केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में राज्यों के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये वित्त आयोग अनुदान के रूप में आवंटित करने की घोषणा की है। इस राशि का उद्देश्य राज्यों को उनकी विकास योजनाओं को सुचारू रूप से लागू करने और आपदा प्रबंधन में सहायता प्रदान करना है। इसमें ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के कामकाज के लिए विशेष धनराशि भी शामिल है। वित्त मंत्री ने बताया कि केंद्र ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिश को मान्यता दी है और राज्यों के लिए केंद्रीय करों से 41% वर्टिकल शेयर निर्धारित किया गया है। इस कदम से राज्यों को अपनी योजनाओं के लिए स्थिर और पर्याप्त वित्तीय मदद मिलेगी।
राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों को पहले ही ग्रामीण निकायों के लिए महत्वपूर्ण अनुदान जारी किया जा चुका है। कुल मिलाकर, यह बजट राज्यों को उनकी स्थानीय और क्षेत्रीय विकास योजनाओं में तेजी लाने और नागरिकों को बेहतर सेवाएं देने में सहायक साबित होगा।
केंद्रीय कर राजस्व में 41% हिस्सा
निर्मला सीतारमण ने बताया कि केंद्र ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिश को मान्यता दी है। इसके तहत राज्यों को केंद्रीय कर राजस्व का 41% हिस्सा मिलेगा। इससे राज्यों को अपने क्षेत्रीय विकास और स्थानीय निकायों की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में सुविधा मिलेगी।
राजस्थान और झारखंड को मिल चुका अनुदान
पिछले साल दिसंबर में राजस्थान और झारखंड को ग्रामीण निकायों के लिए 723 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई थी। राजस्थान में इसका पहला हिस्सा 303 करोड़ रुपये 24 जिला पंचायतों, 339 ब्लॉक पंचायतों और 3,857 ग्राम पंचायतों में बांटा गया। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा।
नारियल उत्पादन बढ़ाने की नई योजना
बजट में नारियल उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए Coconut Promotion Scheme की घोषणा की गई। इस योजना में प्रमुख नारियल उगाने वाले राज्यों में उच्च उत्पादकता वाले पौधे लगाने और नई तकनीक अपनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मकसद किसानों की आमदनी बढ़ाना और उत्पादन में सुधार करना है।
रिकॉर्ड नौवीं बार बजट पेश
निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार बजट पेश कर एक नया रिकॉर्ड बनाया। इस बजट में न केवल राज्यों और स्थानीय निकायों को वित्तीय मदद देने के उपाय शामिल हैं, बल्कि कृषि, उद्योग और रोजगार बढ़ाने के लिए भी नई योजनाओं का प्रस्ताव रखा गया है।