Budget 2026: 1 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार का आम बजट पेश किया जाएगा। हर साल की तरह इस बार भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में यूनियन बजट पेश करेंगी। लेकिन बजट वाले दिन से पहले वित्त मंत्रालय में एक खास परंपरा निभाई जाती है, जिसे हलवा सेरेमनी कहा जाता है। यह सेरेमनी बजट की अंतिम तैयारी की शुरुआत मानी जाती है। हलवा सेरेमनी के बाद कर्मचारियों को भी ऑफिस में लॉक कर दिया जाता है। जानिये क्यों किया जाता है ऐसा?
हलवा सेरेमनी वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक में आयोजित होती है। यहां एक बड़ी कढ़ाई में हलवा बनाया जाता है। वित्त मंत्री खुद इस मौके पर मौजूद रहती हैं और बजट तैयार करने में जुटे अधिकारियों और कर्मचारियों को हलवा बांटती हैं। यह सिर्फ मिठाई बांटने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह संकेत होता है कि बजट का काम अब आखिरी दौर में पहुंच चुका है। बड़े फैसले, आंकड़े और प्रस्ताव लगभग तय हो चुके होते हैं।
हलवा सेरेमनी का मतलब क्यों खास है?
इस सेरेमनी के बाद बजट में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाता। केवल तकनीकी या जरूरी छोटे संशोधन ही संभव होते हैं। साथ ही यह कार्यक्रम उन अधिकारियों की मेहनत को सम्मान देने का तरीका भी है, जो कई महीनों से बजट पर काम कर रहे होते हैं।
क्या होता है लॉक-इन पीरियड?
हलवा सेरेमनी खत्म होते ही बजट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी लॉक-इन पीरियड में चले जाते हैं। इसका मतलब है कि वे बजट पेश होने तक नॉर्थ ब्लॉक परिसर में ही रहते हैं। इस दौरान वे घर नहीं जा सकते, परिवार से नहीं मिल सकते और किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क नहीं कर सकते। मोबाइल फोन, इंटरनेट और अन्य संचार साधनों का इस्तेमाल भी पूरी तरह बंद रहता है।
लॉक-इन पीरियड क्यों जरूरी है?
बजट में टैक्स, सरकारी खर्च, सब्सिडी और अलग-अलग सेक्टरों के लिए आवंटन जैसे बेहद संवेदनशील फैसले होते हैं। अगर इनमें से कोई भी जानकारी पहले लीक हो जाए, तो शेयर बाजार में गड़बड़ी हो सकती है और कुछ लोग गलत फायदा उठा सकते हैं। इसी वजह से पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा जाता है।
कब से शुरू हुई यह परंपरा?
1950 में एक बार बजट लीक होने की घटना सामने आई थी, जिसके बाद सरकार ने सख्त गोपनीय नियम बनाए। तभी से लॉक-इन पीरियड और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। हलवा सेरेमनी बजट की मीठी शुरुआत होती है, जबकि लॉक-इन पीरियड उसकी सख्त सुरक्षा का प्रतीक है।