इकोनॉमिक सर्वे के डेटा से संकेत मिलता है कि इंडियन इकोनॉमी सही रास्ते पर बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बीच इसका प्रदर्शन शानदार है। ऐसे में यूनियन बजट 2026 का फोकस इकोनॉमी की रफ्तार को और बढ़ाने पर होगा। यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2027' के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम होगा।
आम तौर पर हर बजट के लिए दो बड़े सवाल होते हैं: सरकार अपना पैसा कहां खर्च करना चाहती है और वह खर्च के लिए यह पैसा किस तरह से जुटाने जा रही है। बजट 2026 का फोकस भी इन दोनों बातों पर होगा। साथ में सरकार लंबी अवधि की अपनी स्ट्रक्चरल प्रायरिटीज के बारे में बताएगी।
ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले ऐलोकेशंस पर फोकस
इसके अलावा, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की भूमिका बढ़ाने के लिए कई ऐलान हो सकते हैं। इससे 'मेक इन इंडिया' मिशन को बढ़ावा मिलेगा। पॉलिसी को आसान बनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और रेगुलेटरी मामलों में स्पष्टता के जरिए इंडस्ट्री के लिए बाधाएं दूर करने की कोशिश जारी रहेगी। टैक्सेशन और लेबर लॉज में बड़े रिफॉर्म्स के बाद बजट 2026 में सोशल और कॉर्पोरेट रेगुलेशंस को आधुनिक बनाने, ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेज को ध्यान में रख नियमों में बदलाव करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाने पर जोर हो सकता है।
रेवेन्यू और टैक्सेशन की तस्वीर
टैक्स के मामले में यह ध्यान रखने की जरूरत है कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने जा रहा है। यह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। नए एक्ट में टैक्स के प्रावधानों को आसान बनाने की कोशिश की गई है। पुराने और इस्तेमाल नहीं होने वाले क्लॉजेज हटाए गए हैं।
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 से नई टैक्स रीजीम में बड़े बदलाव हुए हैं। कुछ खास कैटेगरी के इंडिविजुअल्स के लिए टैक्स-फ्री इनकम की लिमिट सालाना 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई है। इन बदलावों को देखते हुए अभी नए एक्ट में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। हालांकि, प्रोफेशनल बॉडीज और इंडस्ट्री एसोसिएशंस से मिले फीडबैक के आधार पर छोटे बदलाव हो सकते हैं।
हाल में फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए फाइल इनकम टैक्स रिटर्न के रिफंड्स जारी होने में ज्यादा देरी को लेकर काफी चर्चा हुई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उन टैक्सपेयर्स को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने पॉलिटिकल पार्टीज और एनजीओ को किए गए डोनेशंस के आधार पर रिफंड्स के क्लेम किए हैं। इसके मद्देनजर, बजट में वॉलेंटरी कंप्लायंस के लिए अंतिम मौका देने का ऐलान हो सकता है या ऐसी इनकम को टैक्स के दायरे में लाने के लिए टैक्स अथॉरिटीज के अधिकार बढ़ाए जा सकते हैं। इससे कंप्लायंस और ट्रांसपेरेंसी को मजबूती मिलेगी।
जीएसटी रिफॉर्म्स और मार्केट सेंटिमेंट
साल 2025 में जीएसटी में बड़ा रिफॉर्म्स हुआ, जिसे आम तौर पर जीएसटी 2.0 कहा जाता है। इस रिफॉर्म्स की काफी तारीफ हुई। इससे कंज्यूमर डिमांड खासकर ऑटोमोबाइल और इंश्योरेंस जैसे कुछ सेक्टर्स को ज्यादा फायदा हुआ। इससे इकोनॉमी की रफ्तार बढ़ाने में भी मदद मिली।
उम्मीद है कि वित्त मंत्री जीएसटी 2.0 की चर्चा अपने बजट भाषण में करेंगी। जीएसटी रिफॉर्म्स जारी रखने के ऐलान सरकार की तरफ से हो सकते हैं। अतिरिक्त गुड्स और सेवाओं पर जीएसटी के रेट्स को तर्कसंगत बनाने से मार्केट सेंटिमेंट को मजबूती मिलेगी और कंजम्प्शन बढ़ेगा।
अगर इतिहास को देखा जाए तो सबसे ज्यादा असर डालने वाले ज्यादातर रिफॉर्म्स बजट में होने वाले ऐलान के हिस्सा नहीं रहे हैं। उन्हें साल के दौरान पेश किया गया है। इसलिए बजट 2026 बजट साइकिल से बाहर स्ट्रक्चर रिफॉर्म्स और पॉलिसी एक्शन के लिए रास्ता साफ करेगा।
ऐसे वक्त जब वैश्विक मुश्किलें नई चुनौतियां पेश कर रही हैं, इंडिया को पॉलिसी के लिहाज से सतर्क और चुस्त रहने की जरूरत है। इंडियन इकोनॉमी को तेज ग्रोथ के रास्ते पर बनाए रखने के लिए स्ट्रेटेजिक सप्राइजेज और समय पर रेगुलेटरी इंटरवेंशन की जरूरत बनी रहेगी।