हो सकता है कि केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2027 में डेट सिक्योरिटीज के जरिए 16-17 लाख करोड़ रुपये उधार जुटाए। ऐसी उम्मीद इकोनॉमिस्ट्स ने जताई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 में डेट-टू-GDP रेशियो घटकर लगभग 55 प्रतिशत हो जाएगा। वित्त वर्ष 2026 में इसके 56 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2026 को पेश होने जा रहा है।
बजट 2025-26 में सरकार ने 14.82 लाख करोड़ रुपये की सकल उधारी यानि कि ग्रॉस बॉरोइंग का अनुमान जताया था। लेकिन बाद में हुए ऐलानों से चालू वित्त वर्ष 2026 के लिए कुल उधारी का अनुमान 10,000 करोड़ रुपये कम हो गया। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में सरकार ने 8 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बनाई थी, जिसमें से 7.95 लाख करोड़ रुपये ही उधार लिए गए। इससे पहली छमाही में सरकार की उधारी 5,000 करोड़ रुपये कम हुई।
फिर केंद्र सरकार ने सितंबर 2025 में ऐलान किया कि उसने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही यानि कि अक्टूबर 2025-मार्च 2026 में बाजार से 6.77 लाख करोड़ रुपये की उधारी जुटाने की योजना बनाई है। इस तरह दूसरी छमाही के अनुमान में भी 5,000 करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई। इसके चलते चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार की कुल उधारी 14.72 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया गया, यानि कि बजट अनुमान से 10000 करोड़ रुपये कम।
सितंबर में वित्त मंत्रालय ने कहा था कि दूसरी छमाही की 6.77 लाख करोड़ रुपये की उधारी में से 10,000 करोड़ रुपये सरकारी ग्रीन बॉन्ड के जरिए जुटाने की योजना है। सरकार दूसरी छमाही में उधारी की योजना को 22 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से 6 मार्च 2026 तक पूरा करने वाली है।
नए वित्त वर्ष के लिए इकोनॉमिस्ट्स की राय
पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ICRA ने उम्मीद जताई है कि फिस्कल डेफिसिट-टू-GDP रेशियो में मामूली गिरावट के बावजूद सरकार के ग्रॉस डेटेड मार्केट उधार में 15-16 प्रतिशत की तेज वृद्धि होगी। आंकड़ा 16.9 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है। इसका मुख्य कारण सरकारी बॉन्ड्स के रिडेंप्शन में बढ़ोतरी होगी। हालांकि सरकारी बॉन्ड्स की स्विचिंग से इस बढ़ोतरी का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ICICI बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट समीर नारंग का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 में ग्रॉस बॉरोइंग लगभग 16 लाख करोड़ रुपये और नेट बॉरोइंग 11.6 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। रीपेमेंट शेड्यूल को देखते हुए ग्रॉस बॉरोइंग और बढ़ सकती है। वहीं नोमुरा के इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि नए वित्त वर्ष के लिए सरकार की ग्रॉस बॉरोइंग 17.5 लाख करोड़ रुपये रह सकती है।
फिस्कल एंकर में होने वाला है बदलाव
ICRA में चीफ इकोनॉमिस्ट, हेड-रिसर्च एंड आउटरीच अदिति नायर का कहना है कि वित्त वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में सरकार ने बताया था कि वह वित्त वर्ष 2027 से, आगे हर साल (FY27 से FY31 तक) राजकोषीय घाटे को इस तरह से टारगेट करेगी कि केंद्र सरकार का कर्ज कम होता जाए और 31 मार्च, 2031 तक डेट-टू-GDP का लेवल लगभग 50 ±1% हो जाए। इससे फिस्कल एंकर में बदलाव होगा। यह राजकोषीय घाटे के सालाना टारगेट से डेट-टू-GDP रेशियो पर शिफ्ट हो जाएगा।
मतलब अभी सरकार हर साल राजकोषीय घाटे का लक्ष्य तय करती है, लेकिन आगे चलकर इसका फोकस डेट-टू-GDP रेशियो पर होगा। यानि कि सरकार यह देखेगी कि देश का कुल कर्ज GDP के मुकाबले कितना है और उसे नियंत्रण में रखेगी। दिलचस्प बात यह है कि GDP बेस को भी अपडेट करके 2022-23 किया जा रहा है। इसके अलावा 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें वित्त वर्ष 2027 से लागू होंगी। इससे भारत सरकार और राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू के बंटवारे में और साथ ही केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी जाने वाली ग्रांट में भी बदलाव हो सकते हैं।