यूनियन बजट 2026 में सरकार का ज्यादा फोकस जिन सेक्टर्स पर होगा, उनमें डिफेंस शामिल है। पिछले एक साल में सुरक्षा के लिहाज से भारत के लिए चुनौतियां बढ़ी हैं। इन चुनौतियों को देखते हुए डिफेंस के लिए आवंटन बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का फोकस सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर होगा।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2025 में डिफेंस सेक्टर के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपये का ऐलोकेशन किया था। यह एक साल पहले के एलोकेशन के मुकाबले 9.5 फीसदी ज्यादा था। सरकार का फोकस बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने, देश में हथियारों का प्रोडक्शन बढ़ाने और डिफेंस इक्विपमेंट्स के आयात पर निर्भरता घटाने पर था। डीआरडीओ के लिए भी आवंटन बढ़ाया गया था।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार डिफेंस के लिए ऐलोकेशन 8-10 फीसदी बढ़ाने का ऐलान कर सकती है। मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि इस बार डिफेंस के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर करीब 15 फीसदी बढ़ सकता है। इस बार भी सरकार का फोकस डिफेंस-लिंक्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप्स, ड्रोन और अलायड टेक्नोलॉजी पर होगा।
मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि FY27 में सरकार का पूंजीगत खर्च 12.4 लाख करोड़ रुपये रह सकता है, साल दर साल आधार पर यह 10.3 फीसदी ज्यादा होगा। यह जीडीपी के 3.1 फीसदी के बराबर है। इसमें डिफेंस एक्सपेंडिचर में 15 फीसदी बढ़ोतरी का हाथ होगा। FY26 में डिफेंस एक्सपेंडिचर 1.8 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। FY26 में वन टाइम 40,000 करोड़ रुपये का डिफेंस प्रोक्योरमेंट देखने को मिला।
एक्सिस डायरेक्ट ने कहा है कि इस बार जिन सेक्टर्स पर यूनियन बजट का फोकस रहेगा, उनमें डिफेंस भी शामिल है। सरकार का फोकस खासकर देश में ही डिफेंस इक्विपमेंट का उत्पादन बढ़ाने पर होगा। नुवामा का मानना है कि डिफेंस पर सरकार के पूंजीगत खर्च में साल दर साल आधार पर करीब 8 फीसदी इजाफा हो सकता है। इसमें से ज्यादा ऐलोकेशन आरएंडडी, यूएवी/ड्रोन, एंटी ड्रोन सिस्टम और अलायड टेक्नोलॉजीज पर होगा।
एक्सपर्ट्स ने बताया कि पिछले कुछ सालों में डिफेंस पर फोकस बढ़़ाने का फायदा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखने को मिला। देश में बने डिफेंस इक्विपमेंट ने न सिर्फ पाकिस्तान में बने आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने में बड़ी भूमिका निभाई बल्कि सीमा पर से दागी गई मिसाइलों को भी हवा में नष्ट कर दिया। सरकार देश में डिफेंस इक्विपमेंट का उत्पादन बढ़ाने के साथ उनके निर्यात पर भी फोकस कर रही है।