Health Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज (1 फरवरी) लगातार अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि देश को हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर में वैश्विक ताकत बनाने की दिशा में सरकार बड़े कदम उठाने की तैयारी में है। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि देश में मजबूत, समावेशी और आधुनिक हेल्थकेयर सिस्टम तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।
इस बजट में इलाज, रिसर्च, मेडिकल टूरिज्म, आयुष और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं हर पहलू को छूने की कोशिश की गई है। आपको बता दें, पिछले कुछ सालों में हेल्थ सेक्टर में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन विकसित देशों की तुलना में आज भी भारत का स्वास्थ्य खर्च अब भी GDP का महज 3 से 4 % ही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में भारत को मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के क्षेत्र में एक बड़ा ग्लोबल सेंटर बनाने और सहयोगी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी को दूर करने के लिए कई कदमों की घोषणा की। उन्होंने “हील इन इंडिया” पहल का ऐलान किया, जिसके तहत निजी क्षेत्र के सहयोग से देश में पांच क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज्म हब बनाए जाएंगे। वित्त मंत्री ने संसद में बताया कि ये हब आधुनिक अस्पताल सुविधाओं, उन्नत जांच सेवाओं और इलाज के बाद देखभाल व पुनर्वास की सुविधाओं से लैस एकीकृत केंद्र होंगे।
बजट में विदेशी मरीजों को भारत की ओर आकर्षित करने के लिए पारंपरिक चिकित्सा पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद बनाने और मौजूदा आयुष फार्मेसी व ड्रग टेस्टिंग लैब्स को अपग्रेड करने का प्रस्ताव है। आसान वीजा प्रक्रिया और कम लागत में बेहतर इलाज के विकल्पों के चलते मेडिकल वैल्यू टूरिज्म सेक्टर के 2026 तक 13.42 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह सेक्टर उच्च गुणवत्ता और किफायती वैश्विक हेल्थकेयर के लिए सरकार के “विकसित भारत” विजन की एक अहम नींव माना जा रहा है।
हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस
बढ़ते हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को सहारा देने के लिए बजट में ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट का एक रोडमैप पेश किया गया है। इसके तहत मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड करके एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHPs) को प्रशिक्षित किया जाएगा। खास तौर पर ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और बिहेवियरल हेल्थ सहित करीब 10 क्षेत्रों में ट्रेनिंग पर जोर दिया जाएगा। एक नई पहल के तहत अगले पांच वर्षों में 1.5 लाख जेरियाट्रिक और एलाइड केयरगिवर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य घरेलू स्वास्थ्य देखभाल और वैश्विक मेडिकल टूरिज्म सेक्टर में बढ़ती मांग को पूरा करना है।
भारत आने वाले की बढ़ी संख्या
भारत आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या 2020 में 1,82,945 थी, जो 2024 में बढ़कर 6,44,387 हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में योग, आयुर्वेद और वेलनेस आधारित इलाज इस बढ़ोतरी के बड़े कारण बने हैं, जिससे भारत समग्र और प्रमाण आधारित उपचार के लिए एक पसंदीदा देश के रूप में उभर कर सामने आया है। इन पहलों के साथ सरकार ने फार्मा सेक्टर को भी मजबूती देने का फैसला किया है। वित्त मंत्री ने बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए “बायोफार्मा शक्ति” कार्यक्रम के तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की।