आईटी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट इंडस्ट्री की यूनियन बजट 2026 से कई उम्मीदें हैं। इनमें नए लेबर कोड्स पर स्पष्टीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को बढ़ाने वाले उपाय और टैलैंट पाइपलाइन को स्ट्रॉन्ग बनाने पर फोकस शामिल हैं। इंडस्ट्री का मानना है कि इससे ग्लोबल मार्केट में इंडियन आईटी कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बनी रहेगी।
नए लेबर कोड्स का आईटी कंपनियों पर पड़ेगा असर
आईटी कंपनियों को उम्मीद है कि सरकार यूनियन बजट में नए लेबर कोड्स को लेकर तस्वीर साफ कर सकती है। सरकार ने पिछले साल के आखिर में चार नए लेबर कोड़्स लागू करने का ऐलान किया था। दिसंबर तिमाही के आईटी कंपनियों के नतीजों में नए लेबर कोड्स के संभावित असर के बारे में बताया गया था। नए लेबर कोड्स का लागू होने से देश की बड़ी आईटी कंपनियों पर अतिरिक्त करीब 5,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है।
आईटी सेक्टर को नए लेबर कोड्स पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद
टेक महिंद्रा के सीईओ और एमडी मोहित जोशी ने मनीकंट्रोल को बताया कि नए लेबर कोड्स के प्रावधानों का सीधा असर आईटी कंपनियों के प्रॉफिट पर पड़ेगा। इसलिए इन्हें लेकर तस्वीर साफ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार इस बारे में स्थिति स्पष्ट करेगी। आईटी इंडस्ट्री को सरकार का सपोर्ट मिलता रहा है।
एआई आधारित बदलाव को बढ़ावा देने वाली पॉलिसी की उम्मीद
आईटी इंडस्ट्री यूनियन बजट में सरकार से एआई आधारित बदलाव को बढ़ावा देने वाली पॉलिसी चाहती है। इंडस्ट्री का मानना है कि एआई, ऑटोमेशन और जेनरेटिव एआई अब उत्पादकता और सर्विस की क्वालिटी बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हो चुके हैं। यूनियन बजट में इसके लिए कदम उठाने का बड़ा मौका है। हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज के मैनेजिंग डायरेक्टर वेंकटरमण नारायणनन ने कहा कि आईटी/बीपीएम इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार ग्लोबल डिजिटल और सर्विसेज के हब के रूप में इंडिया की लीडरशिप बनाए रखने वाले उपायों का ऐलान करेगी।
आईटी/बीपीएम की ग्रोथ के लिए सही टैलैंट एक बड़ी चुनौती
आईटी/बीपीएम की ग्रोथ के लिए टैलैंट तैयार करना एक बड़ी चुनौती है। डिजिटल सर्विसेज की डिमांड अच्छी है, लेकिन वर्कफोर्स के मामले में दो तरह की चुनौतियां दिख रही हैं। पहला, एंट्री लेवल पर तैयारी से जुड़ी चुनौती है तो दूसरा मिड-करियर एंप्लॉयीज का इस्तेमाल हायर वैल्यू और टेक्नोलॉजी आधारित रोल के लिए करने से जुड़ी हैं। इंडस्ट्री का फोकस नई हायरिंग को जल्द प्रोडक्टिव बनाने पर है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स में इस्तेमाल
बीसीजी में टेक्नोलॉजी, मीडिया और टेलीकम्युनिकेशंस प्रैक्टिस के इंडिया लीडर नितिन चंदालिया ने कहा कि आईटी सेक्टर हाई-वैल्यू जॉब क्रिएशन को बढ़ावा देने और डिजिटल इनोवेशन को प्रोत्साहित करने वाले उपायों का स्वागत करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता का इस्तेमाल हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में कर सकती है।