Union Budget 2025 से क्या चाहती है हेल्थकेयर इंडस्ट्री? कैंसर का इलाज सस्ता बनाने समेत ये हैं डिमांड और सुझाव

Budget 2025: मेडिकल इक्विपमेंट पर GST को कम करने या छूट देने से हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के लिए अत्याधुनिक तकनीक अधिक किफायती हो जाएगी। इससे मरीजों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण देखभाल मिलना सुनिश्चित होगा। हेल्थकेयर सेक्टर के लिए बजटीय आवंटन को जीडीपी के 2.5 प्रतिशत से अधिक करने की भी मांग है

अपडेटेड Jan 11, 2025 पर 11:35 AM
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Union Budget 2025: भारत में अनुसंधान एवं विकास को सपोर्ट करने और मेड-टेक इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक फंड बनाने का भी सुझाव है।

Budget 2025-26: बजट 2025 करीब है और उम्मीदों, मांगों, सिफारिशों का दौर जारी है। अन्य इंडस्ट्रीज की तरह देश की हेल्थकेयर इंडस्ट्री को भी बजट से कई उम्मीदें हैं। साथ ही उनकी डिमांड्स भी सामने आई हैं। हेल्थकेयर इंडस्ट्री बॉडी NATHEALTH ने सरकार से आगामी केंद्रीय बजट में बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए मेडिकल स्पेशलिस्ट की भारी कमी को दूर करने, कैंसर केयर की बढ़ती लागत और अपर्याप्त हॉस्पिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सिस्टेमेटिक खामियों को दूर करने की गुजारिश की है।

प्री-बजट सिफारिशों में NATHEALTH ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने इन मांगों को रखा है...

  • हेल्थकेयर सेक्टर के लिए बजटीय आवंटन को जीडीपी के 2.5 प्रतिशत से अधिक किया जाए।
  • कम्युनिकेबल और नॉन कम्युनिकेबल बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने के उपाय किए जाएं।
  • कैंसर केयर लागत में कमी के लिए ऑन्कोलॉजी रेडिएशन ​इक्विपमेंट, जैसे कि LINACs, पर सीमा शुल्क हटाया जाए और GST कम करके 5% किया जाए।
  • हेल्थकेयर सेस के साथ-साथ और तंबाकू व शुगर प्रोडक्ट्स पर प्रस्तावित 35 प्रतिशत GST से हासिल आय को पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम्स को मजबूत करने के लिए एलोकेट किया जाए।
  • कच्चे माल की लागत को कम करने के लिए हेल्थकेयर से जुड़े सभी सामान व सर्विसेज पर यूनिफाइड 5 प्रतिशत GST लागू किया जाए।
  • व्यावहारिक इंश्योरेंस रिइंबर्समेंट रेट लागू की जाएं। CGHS, PMJAY और ECHS जैसी योजनाओं के तहत रिइंबर्समेंट रेट्स को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के अनुरूप कर फाइनेंशियल वायबिलिटी सुनिश्चित करने की जरूरत है। इसकी वजह है कि कई दरें लगभग एक दशक से जस की तस बनी हुई हैं।
  • भारत में अनुसंधान एवं विकास को सपोर्ट करने और मेड-टेक इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक फंड की घोषणा की जाए। सरकार के नेतृत्व वाले निवेश के जरिए MBBS और पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीट्स को बढ़ाया जाए। इसे लोन और ब्याज अनुदान जैसे वैकल्पिक फाइनेंसिंग मैकेनिज्म्स का भी सपोर्ट रहे।

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एडवांस्ड डायग्नोस्टिक टेक्नोलोजिज एंड रिसर्च

फिक्की हेल्थ सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन और महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के फाउंडर और चीफ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हर्ष महाजन ने इस बात पर जोर दिया कि टारगेटेड इनवेस्टमेंट जरूरी हैं। ये हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक्स के भविष्य को नया आकार देंगे। उनका कहना है, “अब एडवांस्ड डायग्नोस्टिक्स टेक्नोलोजिज और रिसर्च में निवेश करने का समय है। सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र मेडिकल इक्विपमेंट पर उच्च जीएसटी का है, जो लागत बढ़ाता है और आवश्यक देखभाल तक पहुंच को सीमित करता है। मेडिकल इक्विपमेंट पर जीएसटी को कम करने या छूट देने से हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के लिए अत्याधुनिक तकनीक अधिक किफायती हो जाएगी। इससे मरीजों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण देखभाल मिलना सुनिश्चित होगा।”

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