यूनियन बजट 2025 में सरकार कई बड़े ऐलान करेगी। इसमें एक बड़ा ऐलान फिस्कल डेफिसिट के टारगेट का होगा। सरकार के अगले वित्त वर्ष के फिस्कल डेफिसिट के टारगेट पर करीबी नजरें लगी हैं। फिस्कल डेफिसिट का टारगेट न सिर्फ इकोनॉमी के लिहाज से अहम है बल्कि यह कंपनियों की फंड की जरूरत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मनीकंट्रोल ने अगले वित्त वर्ष के फिस्कल डेफिसिट के टारगेट के बारे में जानने के लिए इकोनॉमिस्ट्स की राय जानने के लिए एक पोल किया। इसमें शामिल 13 इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि 1 फरवरी को वित्तमंत्री फिस्कल डेफिसिट के लिए 4.5 फीसदी टारगेट तय कर सकती हैं।
कुछ इकोनॉमिस्ट्स को 4.4 फीसदी टारगेट की उम्मीद
ICRA में चीफ इकोनॉमिस्ट अदिती नायर ने कहा, "FY26 के लिए फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit Target) का टारगेट 4.5 फीसदी हो सकता है। इसका मतलब है कि अगले वित्त वर्ष का फिस्कल डेफिसिट का टारगेट FY25 के 4.8 फीसदी के अनुमान से 25-30 बेसिस प्वाइंट्स कम होगा।" मनीकंट्रोल के पोल में शामिल कुछ इकोनॉमिक्स्ट्स का मानना था कि सरकार FY26 के लिए फिस्कल डेफिसिट का 4.3-4.4 फीसदी का टारगेट तय कर सकती है।
FY25 का टारगेट 4.9 फीसदी था
बैंक ऑफ बड़ौदा और एचडीएफसी बैंक के इकोॉमिस्ट्स का मानना है कि सरकार का अगले वित्त वर्ष का फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 4.5 फीसदी रहेगा। सरकार ने इस वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट के लिए 4.9 फीसदी का टारगेट तय किया था। पिछले 2-3 सालों से सरकार फिस्कल डेफिसिट को कम करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है। उसका फोकस FY26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाने पर रहा है।
पहले 8 महीनों में फिस्कल डेफिसिट 8.5 लाख करोड़
इस वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में सरकार का फिस्कल डेफिसिट 8.5 लाख करोड़ रहा है। यह पूरे वित्त वर्ष के टारगेट का 52.5 फीसदी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस वित्त वर्ष सरकार के पूंजीगत खर्च में सुस्ती देखने को मिली है। इस वजह से फिस्कल डेफिसिट ज्यादा नहीं रहा है। फिस्कल डेफिसिट का नहीं बढ़ना सरकार और इकोनॉमी के लिए अच्छा है। फिस्कल डेफिसिट कम रहने पर सरकार को बाजार से कम कर्ज लेना पड़ेगा।
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फिस्कल डेफिसिट कम रहने पर सरकार को कम कर्ज लेना पड़ेगा
सरकार फिस्कल डेफिसिट के अगले वित्त वर्ष के टारगेट के हिसाब से बाजार से कर्ज लेने का अनुमान बताएगी। अगर सरकार अगले वित्त वर्ष कम कर्ज लेती है तो इससे इंटरेस्ट रेट पर दबाव घटेगा। प्राइवेट सेक्टर के लिए पर्याप्त कर्ज उपलब्ध होगा। इससे वे पूंजीगत खर्च के लिए उत्साहित होंगी। इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने के लिए प्राइवेट सेक्टर को भी पूंजीगत खर्च में इजाफा करना होगा।