सरकार यूनियन बजट में नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के लिए बड़े ऐलान करने वाली है। सरकार एनपीएस में आम लोगों की दिलचस्पी बढ़ाना चाहती है। सरकार ने 2004 में पेंशन की यह स्कीम पेश की थी। 2009 में यह स्कीम आम लोगों के लिए ओपन कर दी गई। यह रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेस्ट स्कीम है। लेकिन, इसमें आम आदमी की ज्यादा दिलचस्पी देखने को नहीं मिली है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार एनपीएस में टैक्स बेनेफिट बढ़ाती है इसमें आम लोगों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।
NPS में ओल्ड रीजीम के टैक्सपेयर्स को ज्यादा फायदा
अभी इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम (Income Tax Old Regime) के टैक्सपेयर्स को एनपीएस (NPS) में निवेश करने पर ज्यादा टैक्स बेनेफिट मिलता है। एनपीएस (NPS) में सब्सक्राइबर्स को दो तरह से टैक्स बेनेफिट उपलब्ध है। नौकरी करने वाले लोगों के मामले में एंप्लॉयी एनपीएस अकाउंट में अपनी बेसिक सैलरी (प्लस डीए) का 10 फीसदी तक कंट्रिब्यूट कर डिडक्शन का दावा कर सकता है। एंप्लॉयी को इनकम टैक्स के सेक्शन 80CCD(1) के तहत यह टैक्स बेनेफिट मिलता है। वह खुद के कंट्रिब्यूशन पर एक वित्त वर्ष में मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये तक के डिडक्शन का दावा कर सकता है।
2024 के बजट में सरकार ने किया था बड़ा ऐलान
एंप्लॉयर भी एंप्लॉयी के एनपीएस अकाउंट में बेसिक सैलरी (प्लस डीए) के 10 फीसदी तक कंट्रिब्यूशन कर सकता है। गवर्नमेंट एंप्लॉयीज के मामले में बेसिक सैलरी (प्लस डीए) के 14 फीसदी की लिमिट तय है। इसकी इजाजत इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सीसीडी (2) में है। यह सेक्शन 80सीसीडी(1) के तहत 1.5 लाख रुपये तक के एंप्लॉयी के कंट्रिब्यूशन पर मिलने वाले टैक्स बेनेफिट से अलग है। पिछले साल जुलाई में पेश यूनियन बजट में सरकार ने प्राइवेट सेक्टर के एंप्लॉयीज के मामले में एनपीएस अकाउंट में एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन की लिमिट को 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दी थी। यह सिर्फ न्यू रीजीम के टैक्सपेयर्स के लिए किया गया है।
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अभी 50000 रुपये का डिडक्शन सिर्फ ओल्ड रीजीम में
एनपीएस में निवेश पर सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये का डिडक्शन भी मिलता है। लेकिन, यह बेनेफिट सिर्फ इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम के टैक्सपेयर्स को मिलता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को इस डिडक्शन का फायदा इनकम टैक्स की नई रीजीम के टैक्सपेयर्स को भी देना चाहिए। अगर वित्तमंत्री 1 फरवरी को यूनियन बजट में इसका ऐलान करती हैं तो इससे इनकम टैक्स की नई रीजीम में टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी।