Budget 2025: सरकार 10 लाख तक की इनकम टैक्स-फ्री कर सकती है, जानिए इसकी वजह

अब करीब 72 फीसदी टैक्सपेयर्स नई रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी एक वजह यह है कि इसमें पेपरवर्क नहीं के बराबर है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को सबसे ज्यादा दिक्कत पेपरवर्क से होती है। कई लोग सिर्फ इसलिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं क्योंकि उन्हें इसके नियम ठीक तरह से समझ में नहीं आते हैं

अपडेटेड Jan 21, 2025 पर 10:23 AM
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इनकम टैक्स के नियमों को आसान बनाने के लिए सरकार ने यूनियन बजट 2020 में एक बड़ा कदम उठाया था। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स की नई रीजीम की शुरुआत की थी।

यूनियन बजट 2025 से सबसे ज्यादा उम्मीद टैक्सपेयर्स को है। इसकी वजह मीडिया में आई एक खबर है, जिसमें कहा गया था कि सरकार कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स घटाने के बारे में सोच रही है। इससे उन टैक्सपेयर्स की उम्मीद इस बजट से बढ़ गई है, जिनकी सालाना इनकम 15-20 लाख रुपये है। अभी इनकम टैक्स की नई और पुरानी दोनों ही रीजीम में 10-15 लाख रुपये से ज्यादा सालाना इनकम वाले लोगों को सबसे ज्यादा 30 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता है। इकोनॉमिस्ट्स और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने सरकार से कहा है कि अगर मिडिल क्लास के लोगों पर टैक्स घटाया जाता है तो इससे कंजम्प्शन बढ़ सकता है।

नई इनकम टैक्स रीजीम के नियम आसान

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स के नियमों को आसान बनाने के लिए सरकार ने यूनियन बजट 2020 में एक बड़ा कदम उठाया था। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने इनकम टैक्स की नई रीजीम (New regime of income tax) की शुरुआत की थी। इस रीजीम में टैक्सपेयर्स को ज्यादातर डिडक्शंस के फायदें नहीं मिलते हैं, लेकिन टैक्स के रेट्स कम हैं। शुरुआत में इस रीजीम में टैक्सपेयर्स ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। लेकिन, अब इसे टैक्सपेयर्स का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसकी वजह यह है कि सरकार इस रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने की लगातार कोशिश कर रही है।


नई रीजीम में बढ़ रही टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी

अब करीब 72 फीसदी टैक्सपेयर्स नई रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी एक वजह यह है कि इसमें पेपरवर्क नहीं के बराबर है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को सबसे ज्यादा दिक्कत पेपरवर्क से होती है। कई लोग सिर्फ इसलिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं क्योंकि उन्हें इसके नियम ठीक तरह से समझ में नहीं आते हैं। कम इनकम वाले लोगों को इस पेपरवर्क से फ्री कर दिया जाए तो कंप्लायंस बढ़ेगा।

ITR फाइल करने वाले 70% लोगों पर कोई टैक्स नहीं

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के एसेसेटमेंट ईयर 2023-24 के डेटा के मुताबिक, इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले 70 फीसदी लोगों की टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये या इससे कम थी। इसका मतलब है कि इन 70 फीसदी टैक्सपेयर्स पर टैक्स लायबिलिटी नहीं के बराबर है। रिटर्न फाइल करने वाले 88 फीसदी लोगों की इनकम 10 लाख रुपये से कम है। 94 फीसदी लोगों की इनकम 15 लाख रुपये से कम है।

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सरकार के पास 10 लाख तक की इनकम टैक्स-फ्री करने का मौका

उपर्युक्त डेटा से यह साफ हो जाता है कि सरकार को ज्यादा रेवेन्यू उन लोगों से मिलता है, जिनकी सालाना इनकम 10-15 लाख रुपये से ज्यादा है। इसलिए अगर सरकार 10 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स-फ्री कर देती है तो इससे करोड़ों लोगों को बड़ी राहत मिल जाएगी। पिछले कुछ सालों में जिस तरह से महंगाई बढ़ी है, उससे सालाना 10-15 लाख इनकम वाले लोगों का काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। खासकर दिल्ली-मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में तो इतनी इनकम में गुजारा करना तक मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को 10-15 लाख तक इनकम वाले लोगों पर टैक्स घटाने की सलाह दी है।

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