Union Budget 2026: केंद्रीय बजट से पहले हर साल एक खास परंपरा निभाई जाती है, जिसे हलवा सेरेमनी कहा जाता है। 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले बजट से पहले भी यह परंपरा निभाई जाएगी। आम लोगों के लिए यह सिर्फ एक रस्म लग सकती है, लेकिन बजट बनाने की प्रक्रिया में इसका खास महत्व होता है। यह समारोह न सिर्फ बजट की तैयारी की शुरुआत का संकेत देता है, बल्कि गोपनीयता और टीमवर्क का भी प्रतीक माना जाता है।
क्या होती है हलवा सेरेमनी
हलवा सेरेमनी बजट पेश होने से कुछ दिन पहले वित्त मंत्रालय में आयोजित की जाती है। यह कार्यक्रम नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बने बजट प्रेस में होता है। यहां बड़ी कढ़ाही में हलवा बनाया जाता है। वित्त मंत्री इस हलवे को चखकर अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बांटते हैं। इसके साथ ही बजट डॉक्यूमेंट की छपाई का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाता है।
बजट टीम का आइसोलेशन पीरियड
हलवा सेरेमनी के बाद बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए सख्त व्यवस्था की जाती है। बजट छपाई से जुड़े करीब 100 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही रहते हैं। ये लोग बजट पेश होने तक बाहर नहीं जाते और न ही किसी से संपर्क करते हैं। मोबाइल फोन और अन्य संचार साधनों पर भी रोक रहती है, ताकि बजट से जुड़ी कोई जानकारी लीक न हो।
क्यों जरूरी है हलवा सेरेमनी
भारतीय परंपरा में किसी भी शुभ काम की शुरुआत मिठाई से करने की परंपरा है। हलवा सेरेमनी भी इसी सोच को दर्शाती है। बजट तैयार करने में महीनों की मेहनत लगती है और यह आयोजन अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है। इसे टीम को एकजुट करने और काम के अंतिम चरण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
परंपरा और समय के साथ बदलाव
हलवा सेरेमनी की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। हालांकि, 2022 में कोरोना महामारी के कारण इसमें बदलाव किया गया था। उस साल बजट डिजिटल तरीके से पेश हुआ और हलवा सेरेमनी नहीं हुई, सिर्फ मिठाई बांटी गई थी। बाद में 2023 से यह परंपरा फिर से शुरू कर दी गई। आज भी हलवा सेरेमनी भारतीय बजट प्रक्रिया की एक खास और दिलचस्प पहचान बनी हुई है।