Union Budget: 1 फरवरी 2026 को फाइनेंशियल मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगी। यह बजट फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए होगा और मोदी सरकार 3.0 का पहला पूर्ण बजट होगा। इसी वजह से आम लोगों से लेकर कारोबारी जगत तक, सबकी नजरें इस बजट पर टिकी हैं। हर सेक्टर सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है।
जब बजट को कहा गया था ‘ब्लैक बजट’
बजट की चर्चा होते ही इतिहास का एक खास पन्ना भी याद आता है। भारत में 1973-74 का बजट ‘ब्लैक बजट’ के नाम से जाना जाता है। उस समय देश की आर्थिक हालत काफी खराब थी और सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं।
युद्ध और सूखे ने बिगाड़ दी थी हालत
1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ गया था। ऊपर से देश में सूखा पड़ा, जिससे खेती चौपट हो गई। अनाज का उत्पादन गिरा और सरकार की आमदनी पर सीधा असर पड़ा। इन हालातों ने देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया।
तत्कालीन फाइनेंशियल मंत्री यशवंतराव बी. चव्हाण ने उस बजट में 550 करोड़ रुपये के घाटे का खुलासा किया था। उस दौर में यह रकम बहुत बड़ी मानी जाती थी। सरकार ने साफ कहा था कि सूखे और कमजोर उत्पादन की वजह से खर्च बढ़ा और घाटा भी बढ़ गया।
राष्ट्रीयकरण जैसे बड़े फैसले
हालात मुश्किल थे, लेकिन सरकार ने कुछ अहम फैसले भी लिए। कोयला खदानों, बीमा कंपनियों और इंडियन कॉपर कॉरपोरेशन के राष्ट्रीयकरण का ऐलान किया गया। सरकार का मानना था कि इससे बिजली सेक्टर को मजबूती मिलेगी और लंबे समय में फायदा होगा।
2026 के बजट से क्या उम्मीदें?
अब जब 2026 का बजट आने वाला है, तो माहौल बिल्कुल अलग है। माना जा रहा है कि सरकार टैक्सपेयर्स को राहत दे सकती है। जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े भी अच्छे संकेत दे रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि यह बजट आम आदमी और उद्योग, दोनों के लिए राहत लेकर आएगा।