भारत में बजट पेस होने से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार 1 फरवरी को बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने ऐलान किया है कि, भारत अब ईरान से नहीं बल्कि वेनुजुएला से तेल खरीदेगा। बता दें कि कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री मोदी और वेनुजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। दोनों ही देशों ने साझा संबंध को नई उंचाई पर ले जाने की बात कही थी।
ट्रंप ने भारत को लेकर किया बड़ा दावा
अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा, "चीन का स्वागत है कि वह आए और तेल पर एक बड़ी डील करे... हमने पहले ही एक डील कर ली है। इंडिया आ रहा है, और वे ईरान से खरीदने के बजाय वेनेज़ुएला से तेल खरीदेंगे।"उन्होंने वॉशिंगटन डीसी से फ्लोरिडा जाते समय एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “हमने यह डील पहले ही तय कर ली है, कम से कम डील का कॉन्सेप्ट तो फाइनल हो चुका है।”
अमेरिका के राष्ट्रपति के इस बयान से संकेत मिलता है कि वैश्विक ऊर्जा कारोबार में बदलाव हो सकता है। अमेरिका बड़े तेल आयात करने वाले देशों पर दबाव बना रहा है कि वे अपने तेल के स्रोतों में बदलाव करें और नई व्यवस्था अपनाएं। ट्रंप का ये बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका ने एक दिन पहले ही भारत को संकेत दिया था कि वह रूसी कच्चे तेल के कम होते आयात की भरपाई के लिए वेनेज़ुएला से तेल की खरीद फिर से शुरू कर सकता है। पिछले साल अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ लगाया था, लेकिन अब रूस की तेल से होने वाली कमाई घटाने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के रास्ते बदलने के मकसद से उसने अपना रुख बदल लिया है।
वेनुजुएला पर अमेरिकी पकड़ मजबूत
इसी बीच, वेनेज़ुएला में अमेरिका की नई शीर्ष दूत लॉरा एफ डोगू शनिवार को काराकस पहुंचीं। बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन करीब सात साल बाद वहां फिर से अमेरिकी दूतावास खोलने की तैयारी कर रहा है। डोगू, कोलंबिया में स्थित यूएस–वेनेज़ुएला अफेयर्स यूनिट की चार्ज डी’अफेयर्स हैं। उनका काराकस पहुंचना अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक अहम और खुला कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका ने 2019 में अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया था और काराकस स्थित दूतावास का कामकाज बंद कर दिया था।
इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी विदेश मंत्रालय (US स्टेट डिपार्टमेंट) की एक टीम, निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पहली बार वेनेज़ुएला गई थी। वहीं, इस हफ्ते की शुरुआत में स्टेट डिपार्टमेंट ने अमेरिकी कांग्रेस को जानकारी दी कि वह दूतावास की सेवाएं दोबारा शुरू करने के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की योजना बना रहा है। इसमें जरूरत पड़ने पर एक अस्थायी दूतावास सुविधा शुरू करना भी शामिल हो सकता है।