क्रूड ऑयल की कीमत अगर एक तिमाही तक 150 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो भारत की जीडीपी ग्रोथ इस वित्त वर्ष में घटकर 5.7 तक रह सकती है। अगर ऐसा हुआ पिछले कुछ सालों में यह सबसे कम ग्रोथ होगी। यह अनुमान मॉर्गन स्टेनली ने जताया है। उसने 7 अप्रैल को इस बारे में एक रिपोर्ट पब्लिश की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड की कीमतें 150 डॉलर तक पहुंच जाने पर इनफ्लेशन आरबीआई के तय 6 फीसदी के ऊपरी बैंड को पार कर सकता है।
करेंट अकाउंट डेफिसिट 3% तक पहुंच सकता है
मॉर्गन स्टेनली ने भारत के करेंट अकाउंट डेफिसिट के भी बढ़कर करीब 3 फीसदी पहुंच जाने की आशंका जताई है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि अगर ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 95 डॉलर प्रति बैरल रहता है तो FY27 के दौरान भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.2 फीसदी रह सकती है। पहले ब्रोकरेज ने ग्रोथ 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। इस रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे में इनफ्लेशन बढ़कर 5.1 फीसदी तक पहुंच जाएगा।
इनफ्लेशन 6 फीसदी के पार जा सकता है
ब्रेंट क्रूड का भाव पश्चिम एशिया की लड़ाई की वजह से आसमान में है। 7 अप्रैल को यह 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है, "अगर क्रूड का भाव एक तिमाही तक 150 डॉलर प्रति बैरल तक बना रहता है तो इसका असर ग्रोथ और स्टैबिलिटी पर पड़ेगा। ऐसे में ग्रोथ घटकर 5.7 फीसदी पर आ जाएगा, इनफ्लेशन 6 फीसदी के पार हो जाएगा और करेंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी के 3 फीसदी तक पहुंच जाएगा। "
इन तीन वजहों से जीडीपी ग्रोथ पर पड़ेगा असर
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रोथ पर मुख्य रूप से तीन वजहों से पड़ेगा। पहला, प्रोडक्शन में कमजोरी देखने को मिलेगी क्योंकि इस पर एनर्जी और इनपुट कॉस्ट का असर पड़ेगा। दूसरा, कीमतें बढ़ने से कंजम्प्शन में कमी आएगी। तीसरा, लड़ाई से प्रभावित इलाकों में एक्सपोर्ट घटने का असर ग्रोथ पर पड़ेगा। इस वित्त वर्ष में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है। सरकार ने फरवरी में ग्रोथ के अग्रिम अनुमान में यह बताया था।
दूसरी एजेंसियों ने भी भारत की ग्रोथ के अनुमान घटाए हैं
दूसरी ग्लोबल एजेंसियों ने भी इंडिया के ग्रोथ आउटलुक में बदलाव किए हैं। मूडीज रेटिंग्स ने हाल में कहा था कि FY27 में इंडिया की जीडीपी ग्रोथ करीब 6 फीसदी रहेगी। ओईसीडी ने इस वित्त वर्ष में इंडिया की ग्रोथ का अनुमान 6.2 फीसदी से घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया है। मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि क्रूड की ऊंची कीमतों का असर रिटेल इनफ्लेशन के मुकाबले होलसेल प्राइस इंडेक्स पर ज्यादा दिखेगा। रेपो रेट के बारे में ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि आरबीआई इस साल रेपो रेट 5.25 फीसदी बनाए रखेगा।