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Hormuz Disruption: $100 का कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ा रहा मुश्किलें; महंगाई, रुपये के लिए पैदा हो सकता है जोखिम

Hormuz Disruption: भारत अपने कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। पश्चिम एशिया संकट का असर देश के ऊर्जा आयात पर पहले से ही दिखाई दे रहा है। अगर रुकावटें बनी रहती हैं, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100-110 डॉलर प्रति बैरल की सीमा में बनी रहने की संभावना है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Apr 26, 2026 पर 12:35 PM
Hormuz Disruption: $100 का कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ा रहा मुश्किलें; महंगाई, रुपये के लिए पैदा हो सकता है जोखिम
होर्मुज स्ट्रेट अभी भी व्यावहारिक रूप से बंद है और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है।

पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बनकर उभर रहे हैं। कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें महंगाई, रुपये और चालू खाते पर दबाव डाल सकती हैं। एएनआई के मुताबिक, यह बात यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट का टाइटल है- From Hormuz to the Rupee: War, Oil and the Global Repricing of Risk। रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट अभी भी व्यावहारिक रूप से बंद है और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। इसके कारण, मौजूदा हालात वैश्विक या घरेलू आर्थिक संकेतकों और बाजारों के लिए अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, 'तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को जिंदा रखती हैं, केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में नरमी लाने में देरी कराती हैं, चालू खाते पर दबाव डालती हैं, वित्तीय स्थितियों को सख्त बनाती हैं, और जोखिम वाली संपत्तियों पर बोझ डालती हैं, विशेष रूप से उन अर्थव्यवस्थाओं में जो ऊर्जा का आयात करती हैं।"

यह बात भारत जैसे देशों की संवेदनशीलता को दर्शाती है। भारत अपने कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। पश्चिम एशिया संकट का असर देश के ऊर्जा आयात पर पहले से ही दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि होर्मुज से होने वाली आपूर्ति में रुकावट ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है, जिसका परिणाम अर्थव्यवस्था पर एक स्पष्ट एनर्जी टैक्स के रूप में सामने आया है।

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