सरकार पश्चिम एशिया में इजरायल-यूएस और ईरान के बीच जारी जंग के कारण व्यवधान झेल रहे निर्यातकों को राहत देने के लिए आगे आई है। सरकार ने गुरुवार को 497 करोड़ रुपये के आउटले वाली ‘रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन’ (RELIEF) योजना की शुरुआत की। वाणिज्य मंत्रालय में सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, ‘‘हम निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत एक नई योजना की घोषणा कर रहे हैं। यह विशेष रूप से उन 17-18 भौगोलिक क्षेत्रों में काम करने वाले निर्यातकों पर केंद्रित है, जो इजरायल-यूएस और ईरान के बीच संघर्ष से प्रभावित हुए हैं। इसका मकसद उनके सामने आ रही चुनौतियों को कम करना है।’’
उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों को शामिल करते हुए एक अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG) भी बनाया गया है। जैसे कि वाणिज्य मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, पोर्ट्स एंड शिपिंग, वित्तीय सेवा विभाग, विदेश मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) आदि। यह IMG माल ढुलाई की स्थिति के आधार पर विकसित हो रहे हालात का आकलन करने के लिए हर रोज मीटिंग करेगा।
राहत योजना के तहत पैकेज में क्या उपाय
RELIEF स्कीम के लिए ECGC (भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम) को इंप्लीमेंटिंग एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है। राहत योजना के तहत पैकेज में निर्यात दायित्वों का ऑटोमेटिक तरीके से एक्सटेंशन, लॉजिस्टिक संबंधी मदद और खेप में देरी को मैनेज करने के लिए संभावित वित्तीय उपाय शामिल किए गए हैं। यह योजना मुख्य रूप से उन खेप या कंसाइनमेंट्स को कवर करती है, जिनकी डिलीवरी संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, ईराक, ईरान, इजरायल और यमन जैसे देशों को होती है या जो वहां से होकर गुजरते हैं।
स्कीम के 3 प्रमुख हिस्सों की डिटेल
इस योजना के 3 प्रमुख हिस्से हैं। पहले हिस्से के तहत निर्यात दायित्व विस्तार शामिल है। एडवांस ऑथराइजेशन और EPCG ऑथराइजेशन (जो 1 मार्च से 31 मई, 2026 के बीच ड्यू हैं) का ऑटोमेटिक तरीके से विस्तार 31 अगस्त, 2026 तक बिना किसी जुर्माने के किया जाएगा। यह 14 फरवरी से लेकर 15 मार्च तक की एक महीने की तत्काल विंडो में ECGC द्वारा पहले से इंश्योर्ड खेपों की सुरक्षा करता है।
दूसरे हिस्से का उद्देश्य 16 मार्च से लेकर 15 जून तक की 3 महीने की अवधि में आने वाली निर्यात खेपों के लिए ECGC कवरेज को प्रोत्साहित करना और सुगम बनाना है। तीसरा हिस्सा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSMEs) को सरचार्ज के झटकों से बचाने के लिए बनाया गया है। यह 14 फरवरी से लेकर 15 मार्च तक की एक महीने की अवधि में असाधारण माल ढुलाई और बीमा लागत को आंशिक तौर पर रीइंबर्स करता है। यह उन MSME निर्यातकों पर लागू होता है, जिन्होंने ECGC कवरेज नहीं लिया है।