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Israel-Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव बढ़ने से खतरे में आ सकता है भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट्स का दसवां हिस्सा

Israel-Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक अत्यंत संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है। रूट में कोई भी रुकावट, भले ही वह अस्थायी हो, माल ढुलाई की लागत बढ़ा सकती है, डिलीवरी में देरी कर सकती है और एशिया और यूरोप में ट्रेड फ्लो को बदल सकती है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Feb 28, 2026 पर 4:59 PM
Israel-Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव बढ़ने से खतरे में आ सकता है भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट्स का दसवां हिस्सा
भारत के लिए रिस्क केवल एनर्जी सिक्योरिटी तक सीमित नहीं है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते भूराजनीतिक तनाव से भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट्स के दसवें हिस्से से ज्यादा को खतरा हो सकता है। यह बात मनीकंट्रोल के एक एनालिसिस से सामने आई है। भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट में जिन प्रमुख सेक्टर्स पर असर पड़ेगा, उनमें इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स और ज्वेलरी, फूड प्रोडक्ट्स, केमिकल और कंस्ट्रक्शन का सामान शामिल हैं। ये सभी समुद्री लॉजिस्टिक्स पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।

28 फरवरी 2026 को इजराइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान करते हुए एयर स्ट्राइक की। कुछ ही घंटों में ईरान ने भी जवाब देते हुए मिसाइल और ड्रोन से इजराइल पर हमले कर दिए। इससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का डर पैदा हो गया है। इसके कारण पूरे पश्चिम एशिया में समुद्री मार्ग से ट्रेड में रुकावट आ सकती है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक अत्यंत संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है। यह ईरान और ओमान/यूएई के बीच स्थित है। दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यहां तनाव या संघर्ष बढ़ता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है।

भारत के लिए रिस्क केवल एनर्जी सिक्योरिटी तक सीमित नहीं

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