Moody’s Ratings: ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 'Baa3' पर बरकरार रखा है और आउटलुक को 'स्थिर' बताया है। हालांकि, एजेंसी ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी भी दी है। मूडीज का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध भारत की आर्थिक रफ्तार को धीमा कर सकता है और महंगाई का जोखिम बढ़ा सकता है।
रेटिंग 'Baa3' रहने की मुख्य वजहें
मूडीज ने भारत की रेटिंग को स्थिर रखने के पीछे कई पॉजिटिव पहलुओं को आधार बनाया है:
मजबूत बुनियादी ढांचा: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, डिजिटलाइजेशन और बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों ने महामारी के बाद भारत की रिकवरी को सहारा दिया है।
विकास की संभावनाएं: अन्य देशों की तुलना में भारत की विकास दर अभी भी लचीली बनी हुई है।
राजकोषीय सुधार: महामारी के बाद से भारत ने अपने वित्तीय घाटे को धीरे-धीरे कम करने की दिशा में प्रगति की है।
मिडिल ईस्ट युद्ध से भारत के लिए 3 बड़े जोखिम
मूडीज ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत को इन मोर्चों पर नुकसान हो सकता है:
दुगुनी हो सकती है महंगाई: रिपोर्ट के अनुसार, FY27 में महंगाई दर बढ़कर 4.8% हो सकती है, जो इस साल के 2.4% के अनुमान से दोगुनी है। खास तौर पर LPG शिपमेंट में देरी से घरों में ईंधन की किल्लत और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ सकता है।
खाद्य सुरक्षा और खाद: भारत खाद के लिए आयात पर निर्भर है। युद्ध के कारण खाद की आपूर्ति महंगी होने से खेती की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर 'फूड इन्फ्लेशन' पर पड़ेगा।
रेमिटेंस पर असर: भारत को मिलने वाले कुल विदेशी पैसे का लगभग 40% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। वहां रोजगार प्रभावित होने से भारत में विदेशी मुद्रा का भंडार और घरेलू मांग कम हो सकती है।
GDP ग्रोथ में नरमी का अनुमान
मूडीज ने भारत की विकास दर के अनुमान को भी संशोधित किया है:
FY26: जीडीपी ग्रोथ 7.3% रहने का अनुमान है।
FY27: यह घटकर 6.0% पर आ सकती है।
FY28: ग्रोथ में मामूली सुधार के साथ इसके 6.2% रहने की उम्मीद है।
एजेंसी का कहना है कि युद्ध के कारण बढ़ते राजकोषीय दबाव से सरकार के लिए घाटे को कम करने की गति धीमी हो जाएगी।
सरकार पर है कर्ज का भारी बोझ
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती सरकारी कर्ज है। सामान्य सरकारी कर्ज मध्यम अवधि में जीडीपी के 80% से ऊपर रहने का अनुमान है। वहीं सरकार ने FY27 के लिए राजकोषीय घाटा घाटे का लक्ष्य 4.3% रखा है, जो FY26 के 4.4% के मुकाबले बेहद मामूली सुधार है।