आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा को लंबे समय तक इंटरेस्ट रेट कम बने रहने की उम्मीद है। इसकी वजह मजबूत इकोनॉमी और अमेरिका और यूरोप से संभावित ट्रेड डील के फायदे हैं। उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में यह उम्मीद जताई। इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने रेपो रेट 0.25 फीसदी घटा दिया था। इससे रेपो रेट 5.25 फीसदी पर आ गया।
अमेरिका-यूरोप से ट्रेड डील होने पर ग्रोथ आधा फीसदी बढ़ेगी
Sanjay Malhotra ने कहा कि आरबीआई ने इकोनॉमी की ग्रोथ के लिए जो अनुमान दिया है, उसमें ट्रेड एग्रीमेंट्स के संभावित फायदों को ध्यान में नहीं रखा गया है। ट्रेड डील के लिए अमेरिका और यूरोप के साथ इंडिया की बातचीत चल रही है। दोनों देशों से डील होने से इकोनॉमी की ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। मल्होत्रा ने इंटरव्यू में कहा, "अमेरिका से ट्रेड डील होने पर इकोनॉमी की ग्रोथ करीब आधा फीसदी तक बढ़ सकती है।"
सितंबर तिमाही की जीडीपी ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा
उन्होंने कहा कि हाल में आए जीडीपी ग्रोथ के डेटा ने चौंकाया है। इसके चलते आरबीआई को इकोनॉमी की ग्रोथ के अपने अनुमान को बढ़ाना पड़ा है। आरबीआई ने जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। इसके मुकाबले सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.2 फीसदी रही। हालांकि आगे ग्रोथ सुस्त पड़ने का अनुमान है क्योंकि अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ का असर एक्सपोर्ट्स के साथ ही टेक्सटाइल्स से लेकर केमिकल्स सेक्टर पर पड़ेगा।
इकोनॉमी पर ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है, जिसका असर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी पर पड़ रहा है। भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ा है और रुयया गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। हालांकि, रिटेल इनफ्लेशन कम है और जीडीपी ग्रोथ ज्यादा है। ग्रोथ की रफ्तार तेज बनाए रखने के लिए आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में रेपो रेट 25 बीपीएस घटाया था और बैंकिंग सेक्टर में लिक्विडिटी 16 अरब डॉलर तक बढ़ाने के उपाय किए थे।
डेटा में कुछ गलती की गुंजाइश बनी रहती है
इकोनॉमी से जुड़े डेटा की क्वालिटी के बारे में मल्होत्रा ने कहा, "कुछ गलती की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है, क्योंकि इन डेटा को संशोधित किया जाता है। इसे छोड़ दिया जाए तो मेरा मानना है कि डेटा काफी स्ट्रॉन्ग हैं।"