Wholesale Inflation: लगातार चौथे महीने बढ़ी थोक महंगाई, फरवरी में हो गई 2.13%

Wholesale Inflation: फरवरी में महंगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से अन्य मैन्युफैक्चरिंग, बुनियादी धातुओं के निर्माण, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य वस्तुओं और कपड़ों आदि की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण है। पिछले सप्ताह खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी हुए थे

अपडेटेड Mar 16, 2026 पर 12:49 PM
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फरवरी में खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई 2.19 प्रतिशत रही।

देश में थोक महंगाई में लगातार चौथे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फरवरी 2026 में यह 2.13 प्रतिशत रही। इसका मुख्य कारण खाने-पीने की चीजों और गैर-खाद्य वस्तुओं यानि कि नॉन फूड प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी है। हालांकि महीने-दर-महीने आधार पर सब्जियों की कीमतें कम हुई हैं। इससे पहले जनवरी में थोक मूल्य सूचकांक (WPI or Wholesale Price Index) पर बेस्ड महंगाई 1.81 प्रतिशत थी। पिछले साल फरवरी में यह 2.45 प्रतिशत थी।

उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "फरवरी 2026 में महंगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से अन्य मैन्युफैक्चरिंग, बुनियादी धातुओं के निर्माण, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य वस्तुओं और कपड़ों आदि की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण है।"

खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई रही 2.19 प्रतिशत


WPI आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई 2.19 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह 1.55 प्रतिशत थी। दाल, आलू, अंडे, मांस और मछली के मामले में थोक महंगाई फरवरी में मासिक आधार पर बढ़ गई। वहीं सब्जियों की महंगाई फरवरी में घटकर 4.73 प्रतिशत रह गई, जबकि जनवरी में यह 6.78 प्रतिशत थी।

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई भी बढ़कर 2.92 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 2.86 प्रतिशत थी। नॉन फूड आर्टिकल्स कैटेगरी में महंगाई फरवरी में बढ़कर 8.80 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 7.58 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली में थोक महंगाई निगेटिव जोन में रही यानि कि डिफ्लेशन रहा। फरवरी में यह -3.78 प्रतिशत थी, जबकि जनवरी में यह -4.01 प्रतिशत थी।

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खुदरा महंगाई का आंकड़ा

पिछले सप्ताह खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी हुए थे। इनके मुताबिक, देश की खुदरा महंगाई फरवरी 2026 में बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई। जनवरी में यह 2.75 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बेंचमार्क ब्याज दरों पर फैसला लेने के लिए मुख्य रूप से खुदरा महंगाई पर नजर रखता है। RBI ने मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में नीतिगत ब्याज दरों में 1.25 प्रतिशत की कटौती की है।

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