CBSE Class 12 Result 2026: सीबीएसई बोर्ड से शैक्षिक सत्र 2025-26 में 12वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए री-इवैलुएशन शेड्यूल की घोषणा कर दी गई है। 12वीं कक्षा के छात्र 19 मई, 2026 से पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। सीबीएसई बोर्ड ने री-इवैलुएशन के लिए आवेदन करने वाले सभी छात्रों को आगाह किया है कि इस प्रक्रिया में छात्रों के नंबर घट भी सकते हैं।
इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने साफ किया है कि अगर री-चेकिंग में किसी छात्र के नंबर बढ़ते हैं, तो उसकी पूरी फीस वापस कर दी जाएगी। इच्छुक छात्र 19 मई की सुबह से सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाकर "Post Result Services 2026" लिंक के माध्यम से अपने रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड आईडी का उपयोग करके आवेदन कर सकते हैं।
पुनर्मूल्यांकन का शेड्यूल
पहला चरण : उत्तर पुस्तिका की डिजिटल स्कैन कॉपी प्राप्त करना- जो छात्र अपनी जांची गई कॉपी को खुद देखने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत छात्रों को उनकी आंसर शीट की स्कैन की गई डिजिटल कॉपी उनके डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराई जाएगी। तारीख: 19 मई से 22 मई 2026 (रात 11:59 बजे तक) फीस: ₹700 प्रति विषय।
दूसरा चरण : मार्क्स वेरिफिकेशन- यदि छात्र को कॉपी देखने के बाद लगता है कि अंकों के योग (टोटलिंग) में कोई गड़बड़ी है या कोई उत्तर बिना जांचे छूट गया है, तो वे मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। तारीख: 26 मई से 29 मई 2026 फीस: ₹500 प्रति उत्तर पुस्तिका।
सरकार ने छात्रों को दी रीफंड की राहत
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में स्कूल शिक्षा और साक्षरता सचिव संजय कुमार ने ओएसएम की दिक्कतों और 12वीं का रिजल्ट घटने संबंधी छात्रों की आशंकाओं पर बड़ा बयान दिया है। सरकार ने साफ किया है कि बच्चों का हित उनके लिए सबसे ऊपर है। शिक्षा सचिव ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि हमने यह फैसला किया है कि यदि स्क्रूटनी (जांच) की इस प्रक्रिया के दौरान किसी छात्र के अंक बढ़ते हैं या उनमें सुधार होता है, तो हम पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए उनके द्वारा भुगतान की गई पूरी की पूरी राशि वापस कर देंगे।
बोर्ड ने किया ओएसएम का बचाव
सीबीएसई बोर्ड ने इस शैक्षिक सत्र से 12वीं कक्षा में डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ लागू की थी। इसके तहत छात्रों की कॉपियों का मूल्यांकन डिजिटल तरीके से किया है। लेकिन इस साल सीबीएसई बोर्ड का रिजल्ट पिछले सात सालों में सबसे कमजोर रहा है। इस साल 12वीं का कुल पास प्रतिशत 3% गिर कर 85.20% रहा। इसके बाद से सोशल मीडिया सहित तमाम मंचों पर छात्रों, अभिभावकों और टीचरों ने बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। मामले को तूल पकड़ता देख बोर्ड को बाकायदा स्पष्टिकरण भी जारी किया।