CBSE Exam 2026 policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से शैक्षिक सत्र 2025-26 में 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होने वाली हैं। छात्र जी-जान लगाकर परीक्षा की तैयारी करने में लगे हुए हैं। बोर्ड परीक्षा में क्या लेकर जाना है और कैसे परीक्षा में सवालों के जवाब लिखने हैं, जैसी बातों पर कई तरफ से उन्हें सुझाव और सलाह मिल रहे हैं। इस सबके बीच छात्रों के लिए ये भी जानना जरूरी है कि उन्हें परीक्षा छूटने से संबंधित नियमों के बारे में भी जानना जरूरी है। कई बार बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्र बीमार पड़ जाते हैं, या किसी निजी स्थिति की वजह परीक्षा नहीं दे पाते हैं। ऐसी स्थिति में क्या सीबीएसई बोर्ड उनके साथ रियायत बरतेगा या उनका साल बर्बाद हो जाएगा? इस संबंध में सीबीएसई के क्या नियम हैं ?
सीबीएसई की एग्जाम पॉलिसी में सख्त हैं नियम
सीबीएसई उन छात्रों के लिए दोबारा एग्जाम नहीं कराता जो बीमारी या निजी वजहों से बोर्ड का पेपर नहीं दे पाते हैं। 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए कोई “मेक-अप एग्जाम” नहीं होता, मेडिकल सर्टिफिकेट होने पर भी नहीं। ज्यादातर छात्र इस परिस्थिति के लिए तैयार नहीं होते हैं। अगर आप एग्जाम के दिन बीमार होने के बावजूद सेंटर पहुंचते हैं, तो
सीबीएसई मूल्यांकन नीति के तहत बीमारी और अनुपस्थिती को एक जैसा माना जाता है। अगर कोई छात्र बीमारी की वजह से एग्जाम नहीं दे पाता है:
इसके लिए योग्य होते हैं छात्र
कोई छात्र अगर किसी वजह से सिर्फ एक परीक्षा नहीं दे पाता है, तो
उस विषय की परीक्षा सफलतापूर्वक पास करने के बाद ही फाइनल पास सर्टिफिकेट मिलता है। यह तब भी लागू होता है जब:
पारिवारिक इमर्जेंसी/मृत्यु में क्या है नियम?
सीबीएसई की परीक्षा नीति में किसी निजी या पारिवारिक इमर्जेंसी, किसी परिजन की मृत्यु होने पर भी छूट नहीं देती हैं।
स्कूल डॉक्यूमेंटेशन और गाइडेंस में मदद कर सकते हैं, लेकिन बोर्ड का रवैया नहीं बदलता , कोई विशेष परीक्षा नहीं होती।
अनुपस्थित होने पर ग्रेस मार्क्स लागू नहीं होते हैं। इनका इस्तेमाल कुछ खास मामलों में होता है। जब छात्र ने परीक्षा दी हो, लेकिन मूल्यांकन के बाद उसके कुछ अंक कम हैं। बोर्ड अगर किसी खास विषय में बदलाव करता है, तभी ग्रेस मार्क्स का नियम लागू होता है।
कम्पार्टमेंट बनाम इम्प्रूवमेंट
कम्पार्टमेंट परीक्षा : ये उन छात्रों के लिए है जो एक विषय का पेपर नहीं दे पाते या फेल हो जाते हैं। ये बोर्ड का नतीजा आने के बाद होता है और इसे पास करने पर छात्र को पास सर्टिफिकेट मिल जाता है।
इम्प्रूवमेंट एग्जाम : यह ऐसे छात्रों के लिए है जो बोर्ड की मुख्य परीक्षा में पास हैं, लेकिन बेहतर स्कोर चाहते हैं। इसमें सीबीएसई नियमों के अनुसार सीमित विषय की अनुमति है।
बोर्ड परीक्षा में बीमार होने पर
सीबीएसई के परीक्षा नियम बेहद सख्त हैं, लेकिन ये पहले से तय हैं। यह पहले से जानने से छात्र और अभिभावक को आखिरी मिनट की उम्मीद पर भरोसा करने के बजाय शांति से प्लान बनाने में मदद मिलती है।