हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका की जगह जर्मनी क्यों जा रहे भारतीय छात्र, कितनी सस्ती है वहां की पढ़ाई

हाल ही में जर्मनी में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। वर्तमान में लगभग 60,000 भारतीय छात्र जर्मनी में पढ़ाई कर रहे हैं, जो पिछले साल की तुलना में 20% ज्यादा है। जर्मनी छात्रों को अच्छे सुविधाएं, नौकरी के अवसर और सुरक्षित भविष्य का भरोसा देता है

अपडेटेड Aug 24, 2025 पर 3:09 PM
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भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका हायर एजुकेशन का प्रमुख केंद्र था

कई भारतीय छात्रों का विदेश में पढ़ाई करने का सपना होता है। अक्सर छात्र हायर एजुकेशन के लिए छात्र विदेशों में जाते हैं। हाल ही में अमेरिका में सख्त नीतियों की वजह से भारतीय छात्रों की संख्या में कमी देखी गई है। भारतीय छात्र अब अमेरिका की जगह जर्मनी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। जर्मन एंबेसडर डॉ. फिलिप एकरमैन के अनुसार, अब करीब 60,000 भारतीय छात्र जर्मनी में पढ़ाई कर रहे हैं, जो पिछले साल की तुलना में 20% ज्यादा है।

अमेरिका में वीजा की परेशानी, पढ़ाई के बढ़ते खर्च और राजनीतिक अस्थिरता के कारण अब ये छात्रों के बीच हायर एजुकेशन के लिए कम लोकप्रिय हो रहा है। वहीं, जर्मनी छात्रों को अच्छे सुविधाएं, नौकरी के अवसर और सुरक्षित भविष्य का भरोसा देता है।

जर्मनी में कितने छात्रों ने लिया एडमिशन


हाल ही में जर्मनी में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। वर्तमान में लगभग 60,000 भारतीय छात्र जर्मनी में पढ़ाई कर रहे हैं, जो पिछले साल की तुलना में 20% ज्यादा है। विंटर सेमेस्टर 2023-24 के आधिकारिक DAAD (जर्मन अकादमिक एक्सचेंज सर्विस) आंकड़ों के मुताबिक, जर्मन विश्वविद्यालयों में 49,483 भारतीय छात्रों ने एडमिशन कराया है, जो सालाना आधार पर 15.1% की वृद्धि को दर्शाता है।

छात्रों को जर्मनी क्यों आ रहा पसंद

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2025 में अमेरिका में भारतीय छात्रों के आगमन में पिछले साल इसी महीने की तुलना में 46% की बड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी विदेश विभाग के वीजा आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि मार्च से मई 2025 के बीच भारतीय छात्रों को केवल 9,906 F-1 वीजा दिए गए, जबकि 2024 में इसी अवधि में यह संख्या 13,478 थी, जो 27% की तेज कमी को दर्शाती है। यह 2022 के महामारी के बाद के वर्ष के आंकड़ों से भी कम है, जब इसी समय में 10,894 वीजा जारी किए गए थे। ये बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि सोच और दृष्टिकोण को भी दिखाता है। जहां जर्मनी भविष्य को ध्यान में रखकर अधिक अवसर दे रहा है, वहीं अमेरिका कागजी प्रक्रियाओं के चलते छात्रों के रास्ते कठिन कर रहा है।

कितनी है फीस

जर्मनी अब भारतीय छात्रों के लिए सिर्फ एक ऑप्शन नहीं, बल्कि एक बदलते हुए शैक्षणिक परिदृश्य का केंद्र बन गया है। यूनिवर्सिटी लिविंग की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी में भारतीय छात्रों की संख्या 2021 के 28,773 से बढ़कर 2030 तक 1,14,499 तक पहुंचने का अनुमान है, यानी सिर्फ नौ साल में लगभग 298% की बड़ी वृद्धि हो सकती है। जर्मनी का आकर्षण विज्ञापन में नहीं, बल्कि उसके सुव्यवस्थित और व्यावहारिक शिक्षा मॉडल में है। यहां पब्लिक विश्वविद्यालयों में ट्यूशन शुल्क बहुत कम है, आमतौर पर प्रति सेमेस्टर €350 से भी कम है और इसमें परिवहन व छात्र सेवाएं भी शामिल हैं। तकनीकी विश्वविद्यालय ऐसे पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं जो उद्योग के साथ जुड़े हैं और नौकरी के अवसर बढ़ाते हैं। कई कार्यक्रम अब अंग्रेजी में भी उपलब्ध हैं, खासकर इंजीनियरिंग, एआई, स्थिरता और व्यवसाय विश्लेषण में। पढ़ाई खत्म होने के बाद छात्र 18 महीने के नौकरी-तलाश वीजा का फायदा उठा सकते हैं, जो आगे यूरोपीय संघ के ब्लू कार्ड और स्थायी निवास तक ले जाता है।

अमेरिका का कठिन वीजा प्रणाली

भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका जो कभी हायर एजुकेशन का प्रमुख केंद्र था, अब अनिश्चित और कठिन महसूस होने लगा है। 2025 में ट्रम्प प्रशासन ने हजारों छात्र वीजा रद्द किर दिया और कुछ पर गंभीर या अस्पष्ट आरोप लगाए गए। इसके अलावा, F-1 वीजा के लिए चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में 100 दिन से ज्यादा प्रतीक्षा करनी पड़ रही है, बुकिंग सिस्टम में गड़बड़ियां और स्लॉट की कमी इसे और कठिन बना रही हैं। वीजा प्रक्रिया में देरी से सेमेस्टर और लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है। छात्रों और उनके परिवार अब यह जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं। OPT जैसे रोजगार अवसर भी पहले जैसी सुनिश्चितता नहीं दे रहे।

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