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UPSC फाइनल लिस्ट से बाहर हुए उम्मीदवारों के लिए नई पहल, अब ‘प्रतिभा सेतु’ आसान करेगा नौकरी की राह, जानें कैसे

पब्लिक डिस्क्लोजर स्कीम की शुरुआत साल 2018 में हुई थी। सबसे पहले इसे कॉम्बाइंड मेडिकल सर्विस एग्जाम 2017 के उम्मीदवारों पर लागू किया गया था। अब इस योजना को ‘प्रतिभा सेतु’ कहा जाता है। आइए जानते हैं क्या है ‘प्रतिभा सेतु’ और कैसे करता है ये काम

Edited By: Ankita Pandeyअपडेटेड Aug 31, 2025 पर 3:30 PM
UPSC फाइनल लिस्ट से बाहर हुए उम्मीदवारों के लिए नई पहल, अब ‘प्रतिभा सेतु’ आसान करेगा नौकरी की राह, जानें कैसे
पहले इसका नाम पब्लिक डिस्क्लोजर स्कीम (PDS) था (Photo: Canva)

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देश के सबसे कठिन एग्जाम में से एक माना जाता है। हस साल लाखों छात्र यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा का एग्जाम देते हैं। लाखों छात्रों में से कुछ चुनिंदा छात्र ही इसके फाइनल लिस्ट में अपनी जगह बना पाते हैं। कुछ छात्र इस एग्जाम के अंतिम पड़ाव तक पहुंचने के बाद भी कुछ नबंरो से चूक जाते हैं। सिविल सेवा परीक्षा में इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद सेलेक्शन न होने वाले उम्मीदवारों के लिए यूपीएससी ने एक अनोखी पहल की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आज 31 अगस्त को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 125वें एपिसोड में इसका जिक्र किया है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने "प्रतिभा सेतु" नाम की पहल शुरू की है। इसके जरिए वे प्रतिभाशाली उम्मीदवार जो सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू तक तो पहुंचे लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं बना सके। उनको ये प्लेटफॉर्म सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में नौकरी के अवसर प्रदान करेगा। आइए जानते हैं, ‘प्रतिभा सेतु’ क्या है और यह किस तरह काम करेगा।

पीएम मोदी ने क्या कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 125वें 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा, “यूपीएससी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है। हर साल हजारों प्रतिभाशाली उम्मीदवार मामूली अंतर से अंतिम सूची तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे अभ्यर्थियों को फिर से नई परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है, जिसमें उनका समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब 'प्रतिभा सेतु पोर्टल' नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इसमें उन उम्मीदवारों का डेटा रखा जाएगा जिन्होंने यूपीएससी की परीक्षाओं के सभी चरण पास किए, लेकिन फाइनल मेरिट में नहीं आ सके। अब निजी कंपनियां इस डाटाबेस से जानकारी लेकर इन योग्य युवाओं को रोजगार देने का अवसर पा सकेंगी।”

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