
Hassan Sex Scandal: मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सेक्स वीडियो कांड और SIT जांच के बीच हसन सांसद प्रज्वल रेवन्ना (Prajwal Revanna) ने देश छोड़ दिया है। प्रज्वल रेवन्ना और उनके पिता JD(S) नेता एचडी रेवन्ना के खिलाफ उनकी पूर्व घरेलू सहायिका की शिकायत के आधार पर होलेनरासीपुर पुलिस स्टेशन में यौन उत्पीड़न मामले में FIR दर्ज की गई है
लोकसभा भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण अंग है जो भारतीय संघ का लोकतंत्रिक प्रतिनिधित्व करता है। यह देश के लोक सेवा क्षेत्र के सदस्यों के चयन के लिए जिम्मेदार होता है। लोकसभा के सदस्यों को जनता के माध्यम से निर्वाचित किया जाता है और वे लोकतंत्र के मूल तत्वों को प्रतिष्ठित करते हैं, जैसे कि लोकतंत्र, सामान्य जनता के प्रति जिम्मेदारी, और शासन के लिए जनता की आवाज को सुनना। लोकसभा की सभी कानूनों की विधायिका शक्ति है और यह केंद्र सरकार के लिए विशेष महत्व रखती है। लोकसभा में विधायकों की संख्या की सीमा 552 तक होती है।
लोकसभा चुनाव का आयोजन हर पांच साल में होता है। हालांकि अगर कभी केंद्र की सरकार पहले वक्त से पहले गिर जाती है तो भी लोकसभा के चुनाव कराया जाता है।
18 साल से ज्यादा उम्र वाले लोग लोकसभा में वोट डाल सकते हैं। वोट डालने के लिए वोटर आईडी कार्ड होना जरूरी है। किसी भी कानूनी कारणों जैसे मानसिक असंतुलन, कुछ अपराधों के लिए सजा या निर्वासन के कारण, वोटिंग से अयोग्य होने पर वोट डालने का अधिकार नहीं है। वोट डालने के लिए आपके पास वोटर कार्ड होना जरूरी है।
लोकसभा चुनाव में कोई भी भारतीय नागरिक उम्मीदवार बन सकता है जो निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करता है। भारतीय नागरिकता, कम से कम 25 वर्ष की आयु, और कोई अपराधिक या कानूनी अयोग्यता नहीं।
लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग की मुख्य भूमिका है चुनाव प्रक्रिया का प्रबंधन और सुरक्षा करना। इसकी जिम्मेदारी में मतदान, गणना, और चुनावी उल्लंघनों के खिलाफ कार्रवाई शामिल होती है। उसका उद्देश्य निष्पक्ष और नियमित चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।

आखिर कैसे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच बातचीत बनी। कांग्रेस और सपा के बीच तीन बैठकें हुईं, RLD ने भी साथ छोड़ दिया, तब जाकर कांग्रेस को ये समझ आया उसे नरम रुख अपनाना और सहयोगियों के सामने झुकना भी होगा। माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी समेत पार्टी की टॉप लीडर्शिप को ये समझाया कि इस समय अंहकार से ज्यादा जीत जरूरी है, इसलिए थोड़ा समझौता करना हमारे लिए अच्छा होगा। यूपी में कांग्रेस सिर्फ 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बाकी की 63 सीटों पर समाजवादी पार्टी और दूसरे साथी दल अपने चेहरे उतारेंगे। दिल्ली और पंजाब में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस के कुछ विरोधियों के नाराज होने के बावजूद, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जिस समझौते पर सहमत हुए थे।