Bihar Election: भाजपा और जदयू को मिलेंगी बराबर सीटें! चिराग पासवान को लेकर फंस रहा पेंच

Bihar Assembly Election 2025: एनडीए में सीट बंटवारे का सबसे बड़ा पेंच चिराग पासवान की पार्टी को लेकर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चिराग पासवान की पार्टी 40 सीटों की मांग कर रही है। बीजेपी के लिए चिराग की मांग को स्वीकार करना मुश्किल है क्योंकि जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को भी गठबंधन में जगह देनी है

अपडेटेड Aug 24, 2025 पर 9:48 PM
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2020 के चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी LJP वोटकटवा बनी थी, जिससे जेडीयू को सीधे तौर पर 27 सीटों का नुकसान हुआ था

Bihar Assembly Election: बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीटों के बंटवारे पर बातचीत आखिरी दौर में है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और जनता दल (यूनाइटेड) 243 में से लगभग 100-105 सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमत हो गए है। हालांकि, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) की मांगें इस समझौते में एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

'जेडीयू 100 से कम सीटों पर तैयार नहीं'

बिहार में 2020 के पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार बीजेपी और जेडीयू लगभग बराबर सीटों पर लड़ सकती है। पिछली बार जेडीयू ने 115 और बीजेपी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, 2020 में जेडीयू को सिर्फ 43 सीटें मिली थीं, जबकि बीजेपी ने 74 सीटें जीती थीं, फिर भी जेडीयू 100 से कम सीटें लेने को तैयार नहीं है। जेडीयू का तर्क है कि उसकी पिछली खराब परफॉर्मेंस का बड़ा कारण चिराग पासवान की पार्टी थी, जिसने उनके उम्मीदवारों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारे थे।


चिराग पासवान की क्या है डिमांड?

एनडीए में सीट बंटवारे का सबसे बड़ा पेंच चिराग पासवान की पार्टी को लेकर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चिराग पासवान की पार्टी 40 सीटों की मांग कर रही है, लेकिन उन्हें 20 के करीब सीटें मिलने की संभावना है। बीजेपी के लिए चिराग की मांग को स्वीकार करना मुश्किल है क्योंकि जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM-S) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को भी गठबंधन में जगह देनी है। मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के भी एनडीए में शामिल होने की संभावना है, जिससे समीकरण और जटिल हो सकते है।

40 सीटों के पीछे क्या है चिराग का तर्क?

चिराग पासवान 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के शानदार प्रदर्शन का हवाला दे रहे हैं। उनकी पार्टी ने लड़ी गई सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि, जेडीयू के नेता इस तर्क को यह कहकर खारिज कर रहे हैं कि लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़े गए थे, जबकि विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे और जमीनी ताकत ज्यादा मायने रखती है।

2020 के चुनाव में वोटकटवा बनी थी LJP

2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की भूमिका का एनडीए पर अभी भी असर है। तब की अविभाजित एलजेपी ने भले ही 135 सीटें लड़ी थीं और सिर्फ एक जीती थी, लेकिन 64 सीटों पर उसके वोट जीतने वाले उम्मीदवार के मार्जिन से ज्यादा थे। इससे जेडीयू को सीधे तौर पर 27 सीटों का नुकसान हुआ था। बीजेपी नेता मानते हैं कि चिराग पासवान की उपस्थिति का सम्मान करना जरूरी है, लेकिन वे यह भी कहते हैं कि उनकी पार्टी शर्तों को तय नहीं कर सकती। फिलहाल, बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों का बंटवारा लगभग फाइनल है और चिराग पासवान की मांगों को सुलझाना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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