Bihar Elections 2025: भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह का बड़ा ऐलान, नहीं लड़ेंगे बिहार विधानसभा चुनाव

Bihar Elections 2025: पवन सिंह ने कहा है कि उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को जॉइन नहीं किया था। वह पार्टी के सच्चे सिपाही हैं और रहेंगे। पवन सिंह का यह ऐलान पत्नी ज्योति सिंह के साथ विवादों के बीच आया है। ज्योति ने हाल ही में जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर से मुलाकात की

अपडेटेड Oct 11, 2025 पर 4:33 PM
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अटकलें लगाई जा रही थीं कि पवन NDA में शामिल किसी भी पार्टी से विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं।

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार और BJP नेता पवन सिंह ने ऐलान किया है कि वह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नहीं उतरेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बारे में पोस्ट डाली है। लिखा है, 'मैं पवन सिंह अपने भोजपुरिया समाज से बताना चाहता हूं कि मैं बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी जॉइन नहीं किया था और न ही मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना है। मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं और रहूंगा।'

पवन सिंह ने सितंबर महीने में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। साथ ही BJP के सहयोगी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से भी मिले थे। तब से अटकलें लगाई जा रही थीं कि पवन NDA में शामिल किसी भी पार्टी से विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं।

हाल ही में सिंगर और एक्टर पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर से मुलाकात की। किशोर से मिलने के बाद ज्योति सिंह ने कहा, 'मैं यहां चुनाव लड़ने या टिकट मांगने नहीं आई हूं, मैं यह सुनिश्चित करने आई हूं कि किसी और महिला को मेरे जैसा अन्याय न सहना पड़े। ज्योति सिंह ने पवन सिंह पर बेवफाई का आरोप लगाया है। प्रशांत किशोर ने भी कहा, 'ज्योति जी एक बिहारी महिला के तौर पर मिलने आई थीं। हमने उनकी पूरी बात ध्यान से सुनी। उन्होंने कहीं भी यह नहीं कहा कि वह चुनाव लड़ना चाहती हैं या टिकट चाहती हैं। मुझे लगा कि उनका मकसद चुनाव नहीं, बल्कि अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना है।”


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लोकसभा चुनावों में काराकाट सीट से निर्दलीय लड़े थे पवन सिंह

पवन सिंह को बीजेपी ने पहली बार 2024 में लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल के आसनसोल से मैदान में उतारा था। फिर उन पर आरोप लगा उनके म्यूजिक वीडियो और गानों में बंगाली महिलाओं को अभद्र तरीके से दिखाया गया है। इसके बाद पार्टी ने उन पर चुनाव मैदान से हटने के लिए दबाव डाला। बिहार से टिकट देने से भी मना कर दिया। इसके बाद पवन सिंह ने काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। इस सीट से उपेंद्र कुशवाहा भी खड़े थे, जो तीसरे नंबर पर रहे। जीत भाकपा (माले) की हुई। कहा जाता है कि कुशवाहा की हार में पवन सिंह की अहम भूमिका थी।

 

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