पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव और SIR को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच अब भाजपा भी पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार (29 दिसंबर) की शाम तीन दिवसीय दौरे पर कोलकाता पहुंचे। करीब चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अमित शाह का यह दौरा पूरी तरह राजनीतिक माना जा रहा है।
कोलकाता एयरपोर्ट पर अमित शाह का स्वागत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्य, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु आधिकारी ने किया। एयरपोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे। इसके बाद अमित शाह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "पश्चिम बंगाल परिवर्तन के लिए पूरी तरह तैयार है। तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल प्रवास के लिए कोलकाता पहुंचा। एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं के इस स्नेह से अभिभूत हूं।"
एयरपोर्ट से सीधे अमित शाह सॉल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी की कोर कमेटी और चुनाव समिति के साथ अहम बैठकें कीं। इन बैठकों में संगठन की मौजूदा स्थिति, सदस्यता अभियान, बूथ सशक्तिकरण और आगामी चुनावी तैयारियों की समीक्षा की गई। सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह यह जानना चाहते थे कि संगठनात्मक चुनावों के बाद जमीनी स्तर पर पार्टी कितनी मजबूत है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि शाह ने जनवरी से पार्टी की गतिविधियों, रैलियों में मिल रही प्रतिक्रिया और केंद्रीय नेतृत्व के संदेश को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही संभावित रथ यात्रा, उसके रूट और उससे जुड़ी चुनौतियों पर भी मंथन हुआ।
बता दे कि कोलकाता पहुंचते ही अमित शाह ने साफ संकेत दिया कि भाजपा इस बार सत्ता परिवर्तन को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जनता बदलाव चाहती है और भाजपा इस बदलाव का चेहरा बनेगी। शाह के इस बयान को 2026 विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं, दौरे के दूसरे दिन अमित शाह प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और राज्य के प्रमुख नेताओं से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे साइंस सिटी कोलकाता में आयोजित भाजपा सम्मेलन में मंडल, जिला और राज्य स्तर के नेताओं को संबोधित करेंगे। यहां वे पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी मंत्र भी देंगे। तीसरे दिन शाह राज्य के भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सीट रणनीति, उम्मीदवार चयन और विपक्षी तृणमूल कांग्रेस से मुकाबले की रूपरेखा तय की जा सकती है।
SIR विवाद को लेकर जहां तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग और भाजपा पर हमलावर है, वहीं अमित शाह का यह दौरा स्पष्ट करता है कि भाजपा इस मुद्दे को भी चुनावी हथियार बनाने की तैयारी में है।