Bihar E-Voting: अब चुनाव में घर बैठे मोबाइल से कर सकेंगे वोट! बिहार में देश का पहला ई-वोटिंग ऐप लॉन्च, जानें- कैसे करेगा काम
Bihar Election 2025 News: बिहार 28 जून 2025 को स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान मोबाइल फोन आधारित ई-वोटिंग व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। इसे चुनावी प्रक्रिया में एक नए युग के तौर पर देखा जा रहा है। ई-वोटिंग ऐप को बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही लॉन्च किया गया है
एक मोबाइल नंबर से केवल दो रजिस्टर्ड मतदाता लॉग इन कर सकते हैं
Bihar Assembly Election 2025 News: अगर सबकुछ ठीक रहा तो बिहार में इस साल के आखिरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में मतदाता बिना वोटिंग सेंटर्स पर जाए घर से ही वोटिंग कर सकेंगे। जी हां, बिहार देश का पहला राज्य बन चुका है, जिसने वोटर्स को मोबाइल ऐप के जरिए ई-वोटिंग करने की अनुमति दी है। बिहार 28 जून 2025 को स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान मोबाइल फोन आधारित ई-वोटिंग व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। इसे चुनावी प्रक्रिया में एक नए युग के तौर पर देखा जा रहा है।
बिहार चुनाव आयुक्त दीपक प्रसाद ने बताया कि ई-वोटिंग लागू होने के बाद 70.20 प्रतिशत मतदाताओं ने इस नई व्यवस्था का इस्तेमाल किया। जबकि 54.63 प्रतिशत ने मतदान केंद्रों पर जाकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राज्य चुनाव आयोग ने X पर एक पोस्ट में बताया, "बिहार ने आज इतिहास रच दिया है। पूर्वी चंपारण जिले के पकड़ीदयाल की निवासी बिभा कुमारी स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान मोबाइल फोन के जरिए वोट डालने वाली देश की पहली व्यक्ति बन गईं।"
अधिकारी ने कहा, "यह सुविधा, सुरक्षा और सशक्त भागीदारी का प्रतीक है।" प्रसाद ने बताया कि 6 नगर पंचायतों और नगरपालिका उपचुनावों में कुल 62.41 प्रतिशत मतदान हुआ। उन्होंने कहा कि सभी स्थानों पर चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। प्रसाद के मुताबिक सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक 489 मतदान केन्द्रों पर मतदान हुआ, जिसमें 538 उम्मीदवार मैदान में थे।
बुजुर्गों और महिलाओं को होगा फायदा
प्रसाद के मुताबिक, ई-वोटिंग की शुरुआत का उद्देश्य मतदान प्रतिशत बढ़ाना और प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाना है। यह सिस्टम विशेष रूप से उन मतदाताओं के लिए तैयार की गई है, जिन्हें मतदान केंद्रों तक पहुंचने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जैसे कि बुजुर्ग, दिव्यांग, गर्भवती महिलाएं और प्रवासी इत्यादी।
उन्होंने कहा कि केवल पूर्व-रजिस्टऱ्ड यूजर्स को ही ई-वोटिंग के माध्यम से मतदान करने की अनुमति है। राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, जिन जिलों में नगर पंचायत और नगर निगम उपचुनाव हुए उनमें पटना, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, नालंदा, कटिहार, अररिया, सहरसा, पूर्वी चंपारण आदि शामिल हैं। आयोग ने बताया कि मतों की गिनती 30 जून को होगी।
ई-वोटिंग कैसे करेगा काम?
ई-वोटिंग ऐप को बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही लॉन्च किया गया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग की तरफ से यह नहीं बताया गया है कि यह सुविधा अक्टूबर या नवंबर 2025 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान उपलब्ध रहेगी या नहीं। चुनाव आयोग के मुताबिक, एक मोबाइल नंबर से केवल दो रजिस्टर्ड वोटर्स ही ई-वोटिंग के लिए लॉग-इन कर सकते हैं। प्रत्येक वोटर्स का मतदाता पहचान पत्र के डिटेल्स के साथ वेरिफिाई होगा।
- ई-वोटिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सबसे पहले e-SECBHR ऐप डाउनलोड करें। अभी यह ऐप केवल Android डिवाइस के लिए उपलब्ध है।
- ऐप को वोटर्स लिस्ट में रजिस्टर्ड अपने मोबाइल नंबर से लिंक करें।
- एक बार वेरीफाई होने के बाद आप बिहार चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर e-SECBHR ऐप का उपयोग करके वोट डाल सकते हैं।
- एक ही मोबाइल नंबर से केवल दो रजिस्टर्ड मतदाता लॉग इन कर सकते हैं।
- प्रत्येक मतदाता का सत्यापन मतदाता पहचान पत्र संख्या दर्ज करके किया जा रहा है।
वोटर लिस्ट कब होगा जारी?
चुनाव आयोग जल्द ही 2003 की बिहार की वोटर लिस्ट को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा। विपक्षी दलों द्वारा वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक वटर लिस्ट से वंचित न रहे। साथ ही कोई भी अपात्र व्यक्ति इसका हिस्सा न हो। कई विपक्षी दलों ने कहा है कि पुनरीक्षण से राज्य तंत्र का इस्तेमाल करके मतदाताओं को जानबूझकर बाहर करने का खतरा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कवायद का विरोध करने वाले आर्टिकल 326 का भी विरोध कर रहे हैं, इसलिए उन्हें अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। आर्टिकल 326 कहता है कि सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए। जो पात्र नहीं हैं या भारत के नागरिक नहीं हैं, वे मतदाता सूची का हिस्सा नहीं हो सकते।
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि बिहार में पुनरीक्षण के दौरान आयोग ने राजनीतिक दलों को सलाह दी थी कि वे बाद में मतदाता सूची में खामियां निकालने के बजाय अभी से सभी मतदान केंद्रों पर अपने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तरीय एजेंट (BLA) के रूप में नियुक्त करें।
बीएलए पार्टी कार्यकर्ता होते हैं जो मतदाता सूची की तैयारी या संशोधन के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों के साथ समन्वय करते हैं। बिहार में अभी 243 विधानसभा सीट पर 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। राज्य में इस साल के अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं।