Bihar Politics: नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद फूट-फूट कर रो पड़े बिहार के मंत्री अशोक चौधरी, देखें- वीडियो

Bihar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद सोमवार (30 मार्च) को विधान परिषद की सदस्यता यानी MLC के पद से इस्तीफा दे दिया है। नीतीश के इस्तीफे के बाद JDU के नेता और बिहार के मंत्री अशोक कुमार चौधरी भावुक हो गए। वह पत्रकारों से बातचीत में फूट-फूट कर रोने लगे

अपडेटेड Mar 30, 2026 पर 3:36 PM
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Bihar Politics: बिहार के सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद फूट-फूट कर रोए मंत्री अशोक चौधरी

Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधान परिषद सदस्य (MLC) पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार की राजनीति में उथल-पुथल मच गया है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उनके करीबी और बिहार के मंत्री अशोक कुमार चौधरी भावुक हो गए। नीतीश के इस्तीफे से आहत चौधरी रोते हुए नजर आए। कैमरे के सामने उनके फूट-फूट कर रोने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस दौरान उन्होंने कहा, "देश में कोई दूसरा नीतीश कुमार नहीं हो सकता।" नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद सोमवार (30 मार्च) को विधान परिषद की सदस्यता (MLC) से इस्तीफा दे दिया है।

हालांकि उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है।‎ ‎नीतीश कुमार 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। इसके बाद विधान परिषद की सदस्यता से उनके इस्तीफे की चर्चा शुरू हो गयी थी। ‎ ‎

नीतीश के इस कदम के बाद अशोक चौधरी ने news18 को दिए बयान में कहा, "सदन में जिस तरह से वह (सीएम नीतीश) मार्गदर्शन करते थे। दुलारते और जरूरत पड़ने पर डांटते भी थे। वह अब मिस होगा।" उन्होंने यह भी कहा, "नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने विकास और सुशासन का नया दौर देखा। ऐसे में उनके सक्रिय नेतृत्व से हटने की चर्चा हर वर्ग के लोगों को भावुक कर रही है।"


इस माह की शुरुआत में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के MLC संजय कुमार ने कुमार का इस्तीफा विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा।

JDU प्रमुख 16 मार्च को संसद के उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे। एमएलसी पद छोड़ने के लिए निर्धारित 14 दिन की अवधि सोमवार को समाप्त हो रही थी। नीतीश कुमार उन नेताओं में शामिल हैं जो चारों सदनों के सदस्य बने हैं। नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने के दौरान कहा था कि उनकी इच्छा राज्यसभा की सदस्यता के रूप में निर्वाचित होने की थी। इस कारण उन्होंने यह निर्णय लिया।

नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए। वे 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि 10 अप्रैल को वे राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। ‎ ‎

नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार किए। ‎साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार ने 'सुशासन बाबू' के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री रहते शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण समेत कई ऐसी योजनाएं बनाई, जिनकी चर्चा पूरे देश में हुई।

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