EVM Check Order: चुनावी इतिहास में पहली बार ईवीएम से हुए मतदान की दोबारा होगी जांच, जानें- क्या है विवाद और कोर्ट ने क्यों दिया ऐतिहासिक आदेश
Bombay High Court EVM Check Order: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद BJP की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार को लगभग डेढ़ साल हो गए। लेकिन डेढ़ साल बाद चुनाव में एक सीट की EVM-VVPAT की जांच होगी। कांग्रेस नेता नसीम खान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर फिर से गिनती और EVM जांच की मांग की थी
Bombay High Court EVM Check Order: चांदीवली सीट में इस्तेमाल हुई ईवीएम मशीन की 16-17 को जांच होगी
Bombay High Court EVM Check Order: बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनावी इतिहास में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की जांच का आदेश दिया है। मुंबई की चांदीवली सीट से जुड़े इस मामले में आज यानी 16 और कल 17 अप्रैल को मशीनों की जांच होगी। कांग्रेस नेता नसीम खान की याचिका पर हाई कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद, भारत का चुनाव आयोग (ECI) 168-चांदीवली विधानसभा क्षेत्र में इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का निरीक्षण करेगा।
2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में चांदीवली सीट पर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के दिलीप लांडे ने कांग्रेस उम्मीदवार नसीम खान को हराया था। हार के बाद नसीम खान ने EVM-VVPAT मशीनों की तकनीकी जांच की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच की अनुमति दी है। 'न्यूज 18' की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 20 EVM मशीनों की जांच होगी।
आज से शुरू होगी जांच
मुंबई उपनगरीय जिले की उप-विभागीय चुनाव अधिकारी अर्चना कदम के अनुसार, 2024 के विधानसभा चुनावों से संबंधित EVM-VVPAT मशीनों का निरीक्षण (केवल डायग्नोस्टिक जांच तक सीमित) 16 और 17 अप्रैल को मुंबई के बोरीवली (पूर्व) में भारतीय खाद्य निगम के एक गोदाम में किया जाएगा।
जांच के दौरान, याचिकाकर्ता और कांग्रेस उम्मीदवार खान मोहम्मद आरिफ (नसीम) अपने तकनीकी प्रतिनिधि के साथ मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, 168-चांदिवली विधानसभा क्षेत्र के सभी उम्मीदवारों को आमंत्रित किया गया है। इसमें शिवसेना के उम्मीदवार दिलीप लांडे भी शामिल हैं।
कांग्रेस नेता ने क्योंकि शिकायत?
चुनाव आयोग के सामने EVM-VVPAT मशीनों में कथित अनियमितताओं के संबंध में विपक्षी पार्टियों की तरफ से पहले भी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। आलोचकों के अनुसार, EVMs को लेकर उठाई गई चिंताओं का आयोग द्वारा संतोषजनक ढंग से समाधान नहीं किया गया है। चांदीवली से 2024 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना के दिलीप लांडे ने जीत हासिल की थी। जबकि कांग्रेस उम्मीदवार नसीम खान दूसरे स्थान पर रहे थे।
परिणाम घोषित होने के बाद, नसीम खान ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर EVM-VVPAT मशीनों की तकनीकी जांच की मांग की थी। फरवरी में जस्टिस सोमशेखर सुंदरेसन ने मशीनों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के दो महीने बाद आयोग ने जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके बाद आज ईवीएम मशीनों की जांच शुरू होगी।
सिर्फ डायग्नोस्टिक जांच करेंगे इंजीनियर
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद, चुनाव अधिकारी ने 7 अप्रैल को नसीम खान और अन्य सभी उम्मीदवारों को एक लेटर जारी किया। इसमें उनसे निरीक्षण के दौरान उपस्थित रहने का आग्रह किया गया था। लेटर के अनुसार, EVM-VVPAT मशीनों की निर्माता कंपनी बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के इंजीनियर 16 और 17 अप्रैल को केवल एक डायग्नोस्टिक जांच करेंगे। इंजीनियर मशीनों की 'बर्न्ट मेमोरी (burnt memory)' और 'माइक्रोकंट्रोलर' की जांच करेंगे। इसकी जांच सुबह 9:30 बजे शुरू होने हो चुका है।
20 सेट की होगी जांच
नसीम खान ने अनुरोध किया था कि चांदीवली निर्वाचन क्षेत्र में इस्तेमाल की गई EVM मशीनों में से पांच प्रतिशत यानी लगभग 400 मशीनों में से करीब 20 सेट की जांच की जाए। इसके लिए उन्होंने चुनाव आयोग के पास 9.44 लाख रुपये की निर्धारित फीस जमा की। चुनाव अधिकारियों ने चांदिवली सीट से चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को सूचित किया है कि वे पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहें।
क्यों ऐतिहासिक है कोर्ट का फैसला?
भारतीय चुनावी इतिहास में यह पहली बार है जब किसी हाईकोर्ट ने EVM की तकनीकी जांच की अनुमति दी है। इससे पहले वोटिंग मशीन को लेकर अदालतों में कई याचिकाएं दाखिल हुईं, लेकिन इस तरह की प्रत्यक्ष जांच का आदेश नहीं दिया गया था। यह फैसला अदालतों की सक्रियता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। 'न्यूज 18' की रिपोर्ट के मुताबिक, चांदीवली सीट पर हुए मतदान में शिवसेना के दिलीप भाऊसाहेब लांडे को 1,24,641 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस के नसीम खान को 1,04,016 वोट मिले।
इस करारी हार के बाद नसीम खान ने रिजल्ट को चुनौती दी। उन्होंने EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और कोर्ट पहुंच गए। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद भविष्य में अन्य चुनावी मामलों में भी EVM जांच की मांग बढ़ सकती है। इससे चुनाव आयोग पर पारदर्शिता बढ़ाने का दबाव आएगा। हालांकि, विपक्षी पार्टियों को अपने आरोपों के समर्थन में चुनाव आयोग और कोर्ट में ठोस सबूत पेश करने होंगे।
शिकायतकर्ता का बयान
कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री नसीम खान ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा चांदीवली विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम मशीनों की जांच के आदेश को ऐतिहासिक बताया। खान ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि यह फैसला पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवालों और ईवीएम की विश्वसनीयता पर लगे सवालिया निशान को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नसीम खान ने कहा, "हमारी याचिका में यह स्पष्ट था कि हमें ईवीएम मशीनों पर संदेह है। हमें लगता है कि इनके साथ छेड़छाड़ की गई है और गलत प्रोग्रामिंग की गई है। हम कई तरह के संदेह रखते हैं। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार 16 या 17 अप्रैल को जब जांच होगी तो हम अपने सभी सवाल और मुद्दे सामने रखेंगे और पूरी जांच का अनुरोध करेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "हाई कोर्ट का यह आदेश निश्चित रूप से ऐतिहासिक है। इससे पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया पर लगा प्रश्नचिह्न, चुनाव आयोग पर उठ रहे संदेह और मशीन की कार्यप्रणाली पर जो सवाल खड़े हो रहे थे, उनका समाधान होगा। जांच पूरी होने के बाद हम संतुष्ट होंगे।"
नसीम खान ने चांदीवली विधानसभा क्षेत्र के संदर्भ में कहा कि मुंबई हाई कोर्ट का यह आदेश एक मिसाल कायम करेगा। उन्होंने कहा, "एक बार जब 16-17 अप्रैल को यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो चुनाव आयोग को मशीनों को लेकर हमारे संदेहों और मांगों की गहन जांच करनी चाहिए।"
उन्होंने यह भी बताया कि EVM जांच के लिए उन्होंने महाराष्ट्र चुनाव आयोग को पैसे भी दिए थे। नसीम खान ने कहा, "ईवीएम मशीन की जांच करने से पहले अगर महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने कहीं कुछ किया है तो वे हमें बता सकते हैं। हमने EVM की जांच के लिए उन्हें पैसे भी दिए थे।"