Bengal Election 2026: कांटे की टक्कर नहीं, बल्कि बड़े अंतर से हो रही जीत, बंगाल चुनाव हो रहा नर्णायक! पिछले दो बार के नतीजे बयां कर रहे पूरी कहानी
West Bengal Election 2026: हालांकि कुल मिलाकर मार्जिन बढ़ गए हैं, फिर भी कुछ सीटों पर बहुत कड़ी लड़ाई हुई। 2021 में सिर्फ 7 सीटें ऐसी रहीं जहां अंतर 1,000 वोट से भी कम था। इनमें बालारामपुर, दिनहाटा, घाटाल, कुल्टी, दांतन, तामलुक और जलपाईगुड़ी शामिल हैं। इनमें BJP ने 4 और TMC ने 3 सीटें जीतीं
Bengal Election 2026: कांटे की टक्कर नहीं, बल्कि बड़े अंतर से हो रही जीत, बंगाल चुनाव हो रहा नर्णायक!
पश्चिम बंगाल में चुनाव अब करीब आ गए हैं और राज्य में एक बार फिर से भारी मतदान की उम्मीद है। चुनावी प्रचार शुरू होते ही एक बड़ा सवाल सबके मन में है- क्या इस बार के चुनाव और भी निर्णायक होंगे? पिछले चुनावों के नतीजों से पता चलता है कि बंगाल के मतदाता पार्टियों को मजबूती से समर्थन देते हैं, जिससे नतीजे अक्सर साफ-साफ आते हैं।
पहले से ज्यादा निर्णायक हो रहे हैं चुनाव
2016 और 2021 के चुनावी नतीजों की तुलना करने पर साफ दिखता है कि सीटें जीतने के अंतर (मार्जिन) में बड़ा बदलाव आया है।
2016 में ज्यादातर सीटें मध्यम अंतर से जीती गई थीं। कुल 74% सीटें (219 सीटें) सिर्फ 5,000 से 25,000 वोटों के अंतर से जीती गईं। सिर्फ 98 सीटें (33%) ही 25,000 से ज्यादा अंतर से जीती गई थीं।
2021 में यह तस्वीर बदल गई। 25,000 से ज्यादा अंतर वाली सीटों की संख्या बढ़कर 132 हो गई, यानी करीब 44% सीटें। वहीं 10,000 से 25,000 वोटों के अंतर वाली सीटें 121 से घटकर 98 रह गईं। बहुत कम अंतर (1,000 से कम) वाली सीटें सिर्फ 7 ही रहीं।
इससे साफ है कि बंगाल के चुनाव अब पहले से ज्यादा निर्णायक हो रहे हैं। ज्यादा सीटें बड़े अंतर से जीती जा रही हैं, न कि कांटे की टक्कर में।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) को ज्यादा फायदा
बड़े मार्जिन वाली सीटों का फायदा तृणमूल कांग्रेस को BJP से कहीं ज्यादा मिला। 2021 में TMC ने 118 सीटें 25,000 से ज्यादा अंतर से जीतीं, जबकि BJP सिर्फ 13 सीटें ही इस कैटेगरी में जीत पाई।
BJP ने कम और मध्यम अंतर वाली सीटों पर अपनी पकड़ बढ़ाई। लेकिन कुल मिलाकर TMC को मतदाताओं का ज्यादा मजबूत और निर्णायक समर्थन मिला।
कुछ सीटों पर अभी भी कड़ी टक्कर
हालांकि कुल मिलाकर मार्जिन बढ़ गए हैं, फिर भी कुछ सीटों पर बहुत कड़ी लड़ाई हुई। 2021 में सिर्फ 7 सीटें ऐसी रहीं जहां अंतर 1,000 वोट से भी कम था। इनमें बालारामपुर, दिनहाटा, घाटाल, कुल्टी, दांतन, तामलुक और जलपाईगुड़ी शामिल हैं। इनमें BJP ने 4 और TMC ने 3 सीटें जीतीं।
तामलुक सीट इस मामले में खास है। 1962 से लेकर अब तक यहां अक्सर बहुत कम अंतर से जीत हुई है। 1977 में तो सिर्फ 116 वोटों के अंतर से फैसला हुआ था।
सबसे बड़ी जीत और सबसे कड़ी टक्कर
2021 में कुछ सीटों पर बहुत बड़ी जीत हुई, जैसे:
गोसाबा- 1.66 लाख वोटों से
दिनहाटा- 1.64 लाख वोटों से
सुजापुर, खरदहा, मेतियाबुरुज जैसी सीटें भी 1 लाख से ज्यादा अंतर से जीती गईं।
दूसरी तरफ सबसे कम अंतर वाली सीटें थीं- बालारामपुर (423 वोट), दांतन (623), कुल्टी (679), तामलुक (793) आदि।
2026 में क्या होगा?
पिछले दो चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि बंगाल के चुनाव ज्यादा निर्णायक होते जा रहे हैं और बड़ी जीत वाली सीटों की संख्या बढ़ रही है। इस ट्रेंड का सबसे ज्यादा फायदा तृणमूल कांग्रेस को हुआ है।
अब सवाल यह है कि 2026 के चुनाव में भी यही ट्रेंड जारी रहेगा या फिर कई सीटें फिर से कांटे की टक्कर में रहेगी? इसका जवाब न सिर्फ नतीजे तय करेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि सरकार कितनी मजबूत जनादेश के साथ बनेगी।
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा, जिसमें सात करोड़ से ज्यादा मतदाता अपना वोट देंगे।