Video: बंगाल में SIR पर नया बवाल, मालदा में वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर 7 अधिकारियों को 9 घंटे तक बनाया बंधक

Bengal SIR: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बुधवार (1 अप्रैल) को तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया। अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन बुधवार (1 अप्रैल) सुबह कालियाचक दो ब्लॉक विकास कार्यालय के बाहर शुरू हुआ और देर रात तक जारी रहा

अपडेटेड Apr 02, 2026 पर 11:40 AM
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Bengal SIR: बंधक बनाए गए सात अधिकारियों में से तीन महिला न्यायायिक अधिकारी थीं

Bengal SIR: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में जुटे सात न्यायिक अधिकारियों का कई घंटों तक घेराव किया गया। इतना ही नहीं, तीन महिलाओं समेत सात अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया। अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन बुधवार (1 अप्रैल) सुबह कालियाचक दो ब्लॉक विकास कार्यालय के बाहर शुरू हुआ और देर रात तक जारी रहा।

अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पहले न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की मांग की। फिर अंदर एंट्री नहीं दिए जाने पर उन्होंने शाम करीब चार बजे प्रदर्शन शुरू किया। फिर कार्यालय परिसर का घेराव किया। अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यालय के अंदर फंसे व्यक्तियों में तीन महिला न्यायिक अधिकारी भी शामिल थीं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "हमने अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया गया है।" वहीं, जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनके पास विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान करने के लिए छह दिन से भी कम समय बचा है।


नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने की मांग

ऐसे में आयोग को विशेष रूप से गठित न्यायाधिकरणों की स्थापना में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। न्यायिक अधिकारियों को ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस में ही रोककर रखा गया। जबकि लोग बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने नेशनल हाईवे को जाम कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, पुलिस और प्रशासन द्वारा बार-बार जाम हटाने की अपील किए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी वहां से नहीं हटे। उन्होंने कहा कि उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएं।

आयोग के एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि ऐसे मतदाताओं के लिए न्यायाधिकरण ही मामलों के निपटारे का अंतिम उपाय हैं। अधिकारी ने बताया कि बुनियादी ढांचे की कमी के कारण अधिकारी गुरुवार 2 अप्रैल को काम शुरू नहीं कर पाएंगे। इससे मामलों के निपटारे में देरी हो सकती है, जिनमें लाखों नाम जुड़े हैं।

न्यायिक अधिकारी 23 और 29 अप्रैल को बंगाल में होने वाली वोटिंग से पहले जांच-पड़ताल का काम पूरा करने के लिए समय के साथ होड़ लगा रहे हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट के वकील शयन सचिन बसु के अनुसार, हालांकि स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन को इस बारे में जानकारी दी गई थी। लेकिन वे स्थिति को काबू में करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर पाए।

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हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुए रिहा

न्यायिक अधिकारियों ने कलकत्ता हाई कोर्ट को एक संदेश भेजा। इसमें उन्होंने स्थिति की जानकारी दी और अपने बचाव के लिए तुरंत मदद मांगी। इस घटना के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को तलब किया। इसके बाद अधिकारियों को जिले से बचाने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों को तैनात किया गया। बसु ने बताया कि न्यायिक अधिकारियों को बुधवार को रात करीब 1 बजे रिहा कर दिया गया।

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