Bike Ban in Bengal: पश्चिम बंगाल में बाइक बैन को ममता बनर्जी ने बनाया बड़ा चुनावी मुद्दा, आखिर ECI ने क्या आदेश दिया है जिस पर मच गया बवाल

Bike Ban in West Bengal: चुनाव आयोग (ECI) ने 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले सभी 152 निर्वाचन क्षेत्रों में बाइक रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उपायों के तहत ये बैन 21 अप्रैल से लागू हो गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर भारी नाराजगी जताई हैं

अपडेटेड Apr 22, 2026 पर 10:14 AM
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Bike Ban in West Bengal: नए आदेश के मुताबिक बंगाल में मतदान तक किसी भी तरह की मोटरबाइक रैली की अनुमति नहीं होगी

Bike Ban in West Bengal: पश्चिम बंगाल के चुनाव वाले निर्वाचन क्षेत्रों में बाइक के इस्तेमाल पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की सख्ती से तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कदम पर हैरानी और गुस्सा जाहिर किया है। बता दें कि चुनाव आयोग ने 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से ठीक दो दिन पहले 21 अप्रैल की शाम 6 बजे से मोटरबाइक की आवाजाही पर रोक लगा दी है। हालांकि, इसमें इमरजेंसी और पारिवारिक जरूरतों को छूट दी गई है। चुनाव आयोग के आदेश में कहा गया है कि मतदान खत्म होने तक कोई बाइक रैली नहीं निकाली जाएगी।

ECI ने 23 अप्रैल को पहले चरण में चुनाव होने वाले सभी 152 निर्वाचन क्षेत्रों में बाइक रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयोग ने कहा कि बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग से दो दिन पहले से यानी 21 अप्रैल से शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच सड़कों पर मोटरसाइकिल चलाने की इजाजत नहीं होगी।

क्यों लगा बैन?


स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उपायों के तहत ये प्रतिबंध मंगलवार 21 अप्रैल से लागू हो गए हैं। इस बार आयोग ने एक कदम आगे बढ़ते हुए राज्य में बाइक राइडिंग पर स्पेशल निगरानी और कंट्रोल के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को जारी नोटिफिकेशन में आयोग ने मोटरसाइकिल रैलियों और बेवजह बाइक चलाने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।

चुनाव आयोग का मानना है कि मतदान के दौरान बाइक जुलूसों का इस्तेमाल दबदबा बनाने और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। इससे उनकी सुरक्षा पर भी असर पड़ता है। चुनाव आयोग के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। कोलकाता में दूसरे चरण में वोटिंग होगी। जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।

चुनाव आयोग के फैसले का ममता ने क्यों किया विरोध?

दरअसल, हजारों गिग वर्कर अपनी रोज की कमाई के लिए टू-व्हीलर पर निर्भर होते हैं। लेकिन वे अब इस बात को लेकर परेशान हैं कि बंगाल चुनाव से पहले बाइक और पीछे बैठने वालों पर चुनाव आयोग के बैन का उनपर काफी असर होगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में एक रैली में कहा कि चुनाव आयोग का फैसला गरीबों के लिए झटका है। ममता ने बुर्राबाजार के सत्यनारायण पार्क में एक चुनावी रैली में कहा, "अरे बाइक नहीं चलेगा तो घर जाएगा कैसे? बहुत सारी नौकरी करते हैं। दूर-दूर गांव में रहते हैं। यह क्या फरमान है? यह फरमान नहीं, बदमाशी है। शैतानी है।"

40,000 कमर्शियल बाइक राइडर को होगी परेशानी!

कोलकाता और उसके आस-पास के इलाकों में करीब 40,000 कमर्शियल बाइक राइडर हैं। वे पैसेंजर को लाते-ले जाते हैं। साथ ही खाना और दवाइयां ले जाते हैं। वे सामान भी ट्रांसपोर्ट करते हैं। कई कमर्शियल दोपहिया वाहन चालकों ने कहा कि यह बैन उनके लिए एक बड़ा झटका है। ऐप-बाइक चालक शंकर गांगुली ने 'द टेलीग्राफ' से कहा, "हम इसके लिए तैयार नहीं थे। यह दुख की बात है।"

गांगुली ने आगे कहा, "मेरी पत्नी कैंसर की मरीज है। मेरी बेटी को थैलेसीमिया है। मैं एक ऐप-कैब प्लेटफॉर्म पर बाइक-टैक्सी ड्राइवर के तौर पर रोजाना लगभग ₹1,000 कमाता हूं। मुझ पर कई जिम्मेदारियां हैं। दो दिनों तक बिना किसी इनकम के मैं मेडिकल बिलों का भुगतान कैसे करूंगा?"

हरिदेवपुर के रहने वाले गांगुली ने कहा कि पिछले दो सप्ताह में तापमान बढ़ने के कारण दोपहर का समय काफी सुस्त रहा है। बुकिंग भी कम हुई हैं। उन्हें ज्यादातर बुकिंग सुबह और शाम के पीक ऑफिस घंटों के दौरान डलहौजी, सॉल्ट लेक और सेक्टर V से मिलती हैं।

गांगुली ने पूछा, "मैं अपनी पत्नी और बेटी के पास लौटने के लिए जल्दी लॉग आउट कर देता हूं। अब मैं क्या करूंगा?" 23 अप्रैल को वोटिंग के लिए जाने वाले 152 विधानसभा क्षेत्रों के लिए यह पाबंदी मंगलवार से लागू हो गई। बाकी क्षेत्रों के लिए यह पाबंदी 27 अप्रैल से लागू होगी।

क्या है चुनाव आयोग का आदेश?

चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, संवेदनशील इलाकों में चुनाव से दो दिन पहले बाइक रैलियों और मोटरसाइकिल जुलूसों पर पूरी तरह बैन रहेगा। इसके अलावा, हर दिन शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक मोटरसाइकिल चलाने पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि, इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं या पारिवारिक जरूरतों के लिए छूट दी गई है। इतना ही नहीं, चुनाव आयोग ने पिलियन राइडिंग (बाइक पर पीछे बैठने) पर भी सख्ती की है।

नोटिफिकेशन के अनुसार, चुनाव से दो दिन पहले सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक किसी भी बाइक पर पीछे बैठकर यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, इस मामले में भी स्कूल जाने वाले बच्चों, चिकित्सा जरूरतों या पारिवारिक आवश्यकताओं के लिए छूट दी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी को विशेष छूट की आवश्यकता है, तो संबंधित व्यक्ति को नजदीकी पुलिस स्टेशन से लिखित अनुमति लेनी होगी। साथ ही, जिला प्रशासन और पुलिस को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

बैन की बड़ी बातें

- किसी भी तरह की मोटरबाइक रैली की अनुमति नहीं होगी।

- इमरजेंसी और या पारिवारिक समारोहों को छोड़कर शाम 6:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक बाइक चलाने की अनुमति नहीं होगी।

- सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक बाइक पर पीछे बैठकर सवारी करने (पिलियन राइडिंग) की अनुमति नहीं होगी।

- मतदान के दिन, सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक वोटिंग और जरूरी कामों के लिए परिवार के सदस्यों को बाइक पर पीछे बैठकर सवारी करने की अनुमति होगी।

- सीएम ममता बनर्जी ने इन प्रतिबंधों की व्यावहारिकता पर सवाल उठाते हुए रोजाना आने-जाने के लिए बाइक पर लोगों की निर्भरता को लेकर चिंता जताई।

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