पश्चिम बंगाल 'युवा साथी' फॉर्म जमा करने को लेकर मची अफरा-तफरी! BDO ऑफिस में पहुंची हजारों की भीड़

स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में पुलिस मौजूद थी, लेकिन इतनी बड़ी भीड़ को संभालने में प्रशासन नाकाम नजर आया। हालात काबू से बाहर होते देख बाद में अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। इसके बाद किसी तरह स्थिति को कंट्रोल में लाने की कोशिश की गई

अपडेटेड Feb 23, 2026 पर 7:48 PM
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पश्चिम बंगाल 'युवा साथी' फॉर्म जमा करने को लेकर मची अफरा-तफरी! BDO ऑफिस में पहुंची हजारों की भीड़

पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ममता सरकार की 'युवा साथी' योजना को लेकर ज़मीनी स्तर पर सोमवार (23 फरवरी) को तनाव देखने को मिला। ताजा मामला हुगली जिले के आरामबाग BDO ऑफिस का है, जहां 'युवा साथी' योजना से जुड़े फॉर्म जमा करने को लेकर सुबह भारी अफरा-तफरी मच गई।

युवा साथी योजना का लाभ लेने के लिए सुबह से ही हजारों लोग आरामबाग BDO ऑफिस परिसर में जमा हो गए थे। युवा, महिलाएं और मजदूर, सभी सरकारी योजना का लाभ पाने की उम्मीद में लाइन में खड़े नजर आए। लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, हालात बिगड़ते चले गए। और अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई और फॉर्म लेने व जमा करने को लेकर हाथापाई तक हो गई। इस दौरान कई मजदूर गिर पड़े और कुछ लोग भीड़ में दबकर जख्मी हो गए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में पुलिस मौजूद थी, लेकिन इतनी बड़ी भीड़ को संभालने में प्रशासन नाकाम नजर आया। हालात काबू से बाहर होते देख बाद में अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। इसके बाद किसी तरह स्थिति को कंट्रोल में लाने की कोशिश की गई।


सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि कई लोग घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद फॉर्म जमा नहीं कर पाए। मजबूरी में उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ा। महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर खड़ी रहीं, बुजुर्ग धूप में परेशान होते दिखे। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि काउंटर और लाइन की सही व्यवस्था नहीं होने की वजह से हालात और बिगड़ गए।

BDO ऑफिस की तरफ से बाद में लोगों से अपील की गई कि वे अपने-अपने पंचायत कार्यालयों से फॉर्म लें, लेकिन तब तक हालात काफी बिगड़ चुके थे। लोग एक ही जगह जमा हो गए थे, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

बता दें कि ममता सरकार ने हाल ही में युवा साथी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत 21 से 40 वर्ष की आयु के बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1500 रुपए सीधे उनके बैंक खाते में दिए जाएंगे। यह सहायता लगातार 5 वर्षों तक मिलेगी। इसके बाद योजना की समीक्षा की जाएगी और यदि लाभार्थी उस समय भी बेरोजगार रहते हैं तथा उनकी उम्र 40 वर्ष से कम होती है, तो उन्हें आगे भी इस योजना का लाभ मिल सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव नजदीक आते ही सरकारी योजनाओं के लिए लोगों की भीड़ बढ़ रही है। बेरोजगारी और आर्थिक दबाव के कारण युवा साथी जैसी योजनाओं पर आम लोग ज्यादा निर्भर हो गए हैं। यही वजह है कि फॉर्म पाने के लिए हजारों लोग एक साथ पहुंच रहे हैं।विपक्ष इसे राज्य सरकार की फेल व्यवस्था बता रहा है, जबकि सत्ताधारी पार्टी का दावा है कि योजनाओं की लोकप्रियता के कारण भीड़ बढ़ी है।

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