आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले TMC नेताओं के कार पर बम फेंकने की कई हिंसक घटनाएं सामने आईं। इसके बाद TMC पार्षद के होटल से बम और बम बनाने के समान पुलिस ने बरामद किए, और अब हाल ही के राज्य से गिरफ्तार आतंकी उमर फारुख का TMC से कनेक्शन होने की खबर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
दरअसल, गिरफ्तार हुए उमर फारूक की मां ने एक चैनल से बातचीत में यह दावा किया है कि उनका बेटा और पूरा परिवार तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, "हम तृणमूल पार्टी से हैं, मेरा बेटा भी पार्टी का सदस्य था।" इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
इस पूरे मामले पर भाजपा सांसद खागेन मुर्मू ने सत्ताधारी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का आतंकी संगठनों और जमात जैसे कट्टरपंथी समूहों से संबंध है। खागेन मुर्मू का कहना है कि चुनाव जीतने के लिए आतंकियों तक का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में उन पर हुए हमले के पीछे भी उग्रवादी तत्व शामिल थे, जिसकी वजह से उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ा।
इसके साथ ही, भाजपा सांसद का कहना है कि बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में कट्टरपंथी गतिविधियां बढ़ रही हैं और तृणमूल की शह पर ऐसे लोग बंगाल में पनाह ले रहे हैं। उनके मुताबिक, यही लोग राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और हिंसा में शामिल हैं। खागेन मुर्मू ने साफ कहा, "अगर तृणमूल इन लोगों पर निर्भर नहीं होती, तो हर चुनाव में उसके नतीजे इतने अच्छे कैसे आते?"
हालांकि कांग्रेस की दक्षिण मालदा सांसद ईशा खान चौधरी ने इस मुद्दे पर संयम बरतते हुए कहा कि बिना ठोस सबूत किसी पार्टी पर आतंकियों से संबंध का आरोप लगाना बेहद गंभीर बात है। उन्होंने आम जनता से सतर्क रहने की अपील जरूर की।
बता दे कि हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पश्चिम बंगाल समेत 4 अन्य राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश से कुल आठ संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इनमें से छह आरोपी तमिलनाडु के तिरुपुर जिले की एक कपड़ा फैक्ट्री से पकड़े गए, जबकि उमर फारूक और रोबिल-उल-इस्लाम को मुर्शिदाबाद इलाके से गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े नेटवर्क भारत में साजिश रच रहे थे, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।
अब जब बंगाल चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में आतंकवाद और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे सियासी बहस के केंद्र में आ गए हैं। भाजपा इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताते हुए मौजूदा सरकार पर हमला करने की कोई कसर नहीं छोड़ रही है।