VIDEO: 'आप चीफ जस्टिस के भी फोन नहीं उठा सकते?': SC ने बंगाल के चीफ सेक्रेटरी को लगाई फटकार, मालदा मामले की जांच NIA को सौंपी

Malda Incident: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को अपनी पूर्ण एवं असीमित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कार्य में जुटे सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले से संबंधित मामलों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को ट्रांसफर कर दिया। इस दौरान बंगाल के चीफ सेक्रेटरी को जमकर फटकार लगाई

अपडेटेड Apr 07, 2026 पर 8:18 AM
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Malda Incident: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी आपसे संपर्क नहीं कर सकें

Malda Incident: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को पश्चिम बंगाल के चीफ़ सेक्रेटरी को जमकर फटकार लगाई। यह फटकार इसलिए लगाई गई क्योंकि उन्होंने उस दिन कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के फोन नहीं उठा पाए, जिस दिन मालदा जिले में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के काम में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को कथित तौर पर बंधक बना लिया गया था। उन पर हमला भी किया गया था। यह घटना 1 अप्रैल को हुई थी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि मालदा घटना के सिलसिले में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 26 लोगों से नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) पूछताछ करे।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी दुश्यंत नरियाला को घटना वाले दिन कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस के फोन कॉल न उठाने के लिए फटकारा। बेंच ने उनसे माफी मांगने को भी कहा। पीठ ने कहा कि यह जिला प्रशासन की नाकामी को दिखाता है।

पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नौकरशाही की विश्वसनीयता कम की जा रही है। अदालत ने कहा कि सचिवालय एवं सरकारी कार्यालयों में राजनीति घुसाई जा रही है। पीठ ने आदेश दिया कि राज्य पुलिस द्वारा मालदा घटना से जुड़े 26 गिरफ्तार व्यक्तियों से NIA द्वारा पूछताछ की जाए, भले ही वे न्यायिक हिरासत में क्यों न हों।


'कॉल न उठाने के लिए माफी मांगनी चाहिए'

शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुश्यंत नरियाला को फटकार लगाई कि उन्होंने एक अप्रैल को कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की कॉल उस वक्त नहीं उठाई, जब न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया गया था। पीठ ने मुख्य सचिव से कहा कि उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कॉल न उठाने के लिए माफी मांगनी चाहिए।

पीठ ने कहा, "यह जिला प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।" शीर्ष अदालत ने कहा कि मालदा में एसआईआर कार्य में जुटे न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेर लिए जाने की घटना वास्तव में पूर्व-नियोजित और किसी विशेष उद्देश्य से प्रेरित थी।

पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 700 न्यायिक अधिकारी एसआईआर प्रक्रिया में तैनात किए गए थे। ताकि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए 60 लाख से अधिक आपत्तियों और दावों को निपटाया जा सके।

मालदा के एक अधिकारी को नोटिस

मालदा के अतिरिक्त जिलाधिकारी (कानून-व्यवस्था) शेख अंसार अहमद को SIR प्रक्रिया पर कथित टिप्पणियां करने और 31 मार्च को कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों के घेराव के दौरान सुरक्षा में चूक को लेकर दो कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी राजनवीर सिंह कपूर ने अहमद को ये नोटिस जारी किए। उनसे सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा है। एक नोटिस के अनुसार, अहमद को 31 मार्च को कानून-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी पर तैनात किया गया था।

नोटिस में कहा गया कि बाद में सोशल मीडिया मंचों और अन्य स्रोतों के जरिए प्रशासन के संज्ञान में यह बात आई कि अहमद ने न्यायिक अधिकारियों का घेराव करने वाले लोगों को ड्यूटी के दौरान बिना पूर्व अनुमति के संबोधित किया। साथ ही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। इसमें कहा गया कि संबोधन के दौरान उन्होंने उच्च अधिकारियों की जानकारी या मंजूरी के बिना आम लोगों से कुछ वादे किए जो संभवतः उनके पद की अधिकार-सीमा से बाहर थे।

नोटिस में कहा गया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया कि वह एसआईआर में आपत्तियों के निस्तारण की तारीख बढ़वाने का प्रयास करेंगे। जबकि यह विषय निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अधीन है। नोटिस में कहा गया कि इस तरह के बयान, भले ही अच्छी नीयत से दिए गए हों, आम लोगों में अनावश्यक अपेक्षाएं पैदा कर सकते हैं। संभव है कि वे उन्हें सौंपी गई भूमिका के अनुरूप न हों।

क्या है मामला?

भीड़ ने 31 मार्च को कालियाचक के प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यालय में तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाए रखा था। उन्हें बचाए जाने के बाद भी न्यायिक अधिकारियों के वाहनों पर पथराव किया गया और डंडों तथा ईंटों से हमला किया गया।

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इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी थाने के प्रभारी निरीक्षक को नामांकन प्रक्रिया के दौरान नैहाटी नगरपालिका के अध्यक्ष अशोक चटर्जी को उप-मंडलाधिकारी (एसडीओ) कार्यालय ले जाने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अर्जुन सिंह ने एक वीडियो शेयर किया। इसमें चटर्जी पुलिस वाहन से उतरकर बैरकपुर स्थित एसडीओ कार्यालय में तृणमूल कांग्रेस के नैहाटी से उम्मीदवार सनत डे की नामांकन प्रक्रिया में शामिल होने जाते दिख रहे हैं।

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