चुनाव आयोग के साथ बैठक बीच में छोड़ कर निकलीं ममता बनर्जी, EC सूत्रों ने TMC विधायकों के ‘अपमानजनक’ रवैये का लगाया आरोप
इस बैठक में ममता बनर्जी के साथ कई वरिष्ठ TMC नेता और वे परिवार भी मौजूद थे, जो SIR प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। बैठक के बाद ममता ने पत्रकारों से कहा कि उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, इसलिए प्रतिनिधिमंडल ने बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया
चुनाव आयोग के साथ बैठक बीच में छोड़ कर निकलीं ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बैठक बीच में ही छोड़ दी। यह बैठक राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर थी, जिसमें वोटर लिस्ट की जांच और संशोधन किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनका अपमान किया और प्रभावित परिवारों की बात नहीं सुनी।
इस बैठक में ममता बनर्जी के साथ कई वरिष्ठ TMC नेता और वे परिवार भी मौजूद थे, जो SIR प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। बैठक के बाद ममता ने पत्रकारों से कहा कि उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, इसलिए प्रतिनिधिमंडल ने बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया।
उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग ने हमारा अपमान किया। उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी, इसलिए हम बैठक छोड़कर बाहर आ गए।”
चुनाव आयोग ने आरोप खारिज किए
वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों ने ममता बनर्जी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त धैर्यपूर्वक सभी सवाल सुन रहे थे, लेकिन ममता बनर्जी कथित तौर पर गुस्से में आ गईं, मेज पर हाथ मारा और बिना जवाब सुने बैठक छोड़कर चली गईं।
सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी ने CEC को जवाब देने का मौका ही नहीं दिया।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस पूरे घटनाक्रम को “अनुचित” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के बाहर ड्रामा किया।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी एक घंटे से ज्यादा समय तक चुनाव आयोग में रहीं और अब कह रही हैं कि बैठक का बहिष्कार किया गया, जो विरोधाभासी है। उनका व्यवहार और पुलिस की मौजूदगी पूरी तरह गलत थी।
TMC विधायकों पर गंभीर आरोप
चुनाव आयोग के सूत्रों ने दावा किया कि बैठक के दौरान कुछ TMC विधायकों ने चुनाव आयोग, खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपशब्द और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया।
CEC ज्ञानेश कुमार ने साफ कहा कि कानून का पालन सभी को करना होगा और जो भी कानून अपने हाथ में लेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
ममता बनर्जी के बड़े आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया केवल चुनाव वाले राज्यों में ही की जा रही है। उन्होंने कहा कि असम जैसे राज्यों में, जहां बीजेपी की सरकार है, वहां SIR नहीं किया गया, लेकिन पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि बंगाल में 58 लाख मतदाताओं के नाम बिना उचित मौका दिए मतदाता सूची से हटा दिए गए।
दस्तावेजों पर सवाल
ममता ने पुराने दस्तावेज मांगने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले कई बच्चे घर पर पैदा होते थे, अस्पताल में नहीं, ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र मांगना गलत है। उन्होंने चुनावों को लोकतंत्र का “त्योहार” बताया।
भावुक हुईं ममता
भावुक होते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में चुनाव आयोग का ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा कि वे संस्था का सम्मान करती हैं, लेकिन बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
आंकड़े और विरोध प्रदर्शन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, SIR के पहले चरण में बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई। इस प्रक्रिया के तहत करीब 1.36 करोड़ नोटिस “तार्किक विसंगतियों” के नाम पर भेजे गए हैं।
इस मुद्दे को लेकर राज्य भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ममता बनर्जी ने पिछले कुछ महीनों में इस विषय पर CEC को छह पत्र लिखे हैं। उनके अनुसार, SIR प्रक्रिया के कारण 140 लोगों की मौत भी हुई है और यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है।