आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में SIR को लेकर सियासत तेज है। राज्य में फाइनल वोटर लिस्ट 28 फरवरी को जारी होनी है, जबकि बड़ी संख्या में आवेदन और आपत्तियों का निपटारा अभी बाकी है। इसी मुद्दे को लेकर राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग को कड़ा संदेश दिया।
मंगलवार (24 फरवरी) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक सभी आवेदन और शिकायतों का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक फाइनल सूची जारी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने साफ कहा, "हम चुनाव के लिए तैयार हैं, लेकिन SIR पूरी हुए बिना वोट नहीं होगा। पहले सही वोटर लिस्ट बने, उसके बाद ही वोटिंग हो। SIR नहीं तो वोट नहीं।"
वहीं, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि गैर-भाजपा शासित राज्यों, जैसे केरल और तमिलनाडु, में भी SIR शांतिपूर्वक पूरा हो गया, लेकिन बंगाल में लगातार विवाद और अव्यवस्था की खबरें आ रही हैं। उन्होंने कहा, "यहां जितनी समस्याएं दिख रही हैं, उतनी अन्य राज्यों में कहीं नहीं दिखीं। कहीं कोई तोड़फोड़ नहीं हुई। और यहां तो अब जज भी घबराए हुए हैं।" साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन का राजनीतिकरण हो चुका है और इस वजह से प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसके साथ ही भाजपा अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से अपील की कि वे खुद राज्य का दौरा करें, खासकर मुर्शिदाबाद के डोमकल जैसे संवेदनशील इलाकों में जाकर जमीनी स्थिति देखें। उन्होंने कहा कि अंतिम आरोपपत्र दाखिल होने तक सभी मामलों की सुनवाई पूरी की जानी चाहिए, चाहे इसमें कुछ अतिरिक्त समय ही क्यों न लगे।
फॉर्म-7 को लेकर भी विवाद गहराता दिख रहा है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 भरवाकर लोगों को परेशान कर रही है। इसके जवाब में समिक ने कहा, "कई जगहों पर BLA-2 के नाम पर जाली हस्ताक्षर किए जा रहे हैं और बुजुर्ग मतदाताओं को अनावश्यक सुनवाई में बुलाया जा रहा है।" उन्होंने दावा किया कि 90 प्रतिशत मामलों में ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हैं।
बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट का मुद्दा बेहद अहम हो गया है। क्योंकि साफ और बिना गलती वाली वोटर लिस्ट ही निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद मानी जाती है। विपक्ष का कहना है कि अगर सूची में गड़बड़ी रही तो चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे।
कुल मिलाकर, आगामी बंगाल चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन गई है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग तय समय सीमा में सभी आपत्तियों का निपटारा कर निष्पक्ष मतदाता सूची जारी कर पाता है या नहीं।