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नॉर्थ बंगाल की चुनावी चाय है काफी कड़क! 54 सीटों से हो जाएगा फैसला पश्चिम बंगाल चुनाव का फैसला

उत्तरी बंगाल को अक्सर “स्विंग जोन” यानी ऐसा इलाका कहा जाता है, जहां चुनावी रुझान जल्दी बदल जाते हैं। इसकी वजह भी साफ है—यहां के मतदाता हर कुछ चुनावों के बाद अपना समर्थन बदल देते हैं। जलपाईगुड़ी जैसे जिले इसका अच्छा उदाहरण हैं। यहां शहर के लोग, गांव की आबादी और चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर—तीनों का मिला-जुला असर चुनावी माहौल को बहुत अनिश्चित बना देता है

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Mar 27, 2026 पर 3:57 PM
नॉर्थ बंगाल की चुनावी चाय है काफी कड़क! 54 सीटों से हो जाएगा फैसला पश्चिम बंगाल चुनाव का फैसला
उत्तरी बंगाल में एक बार फिर “चाय की राजनीति” तेज होती दिख रही है।

उत्तरी बंगाल में एक बार फिर “चाय की राजनीति” तेज होती दिख रही है। इस इलाके की 54 विधानसभा सीटें राज्य में अगली सरकार बनाने में बहुत अहम मानी जा रही हैं। जैसे यहां की मशहूर चाय का स्वाद सही समय और हालात पर निर्भर करता है, वैसे ही यहां का चुनावी माहौल भी खास तौर पर “स्विंग वोटर” यानी निर्णायक मतदाताओं पर टिका होता है। पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटों के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा। इसके बाद 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। चाय बागानों, डुआर्स और पहाड़ी इलाकों से घिरा उत्तरी बंगाल लंबे समय से राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है।

दांव पर 54 सीट

यह इलाका पहले वामपंथी दलों का गढ़ माना जाता था, लेकिन 2011 में यहां बड़ा बदलाव देखने को मिला। उस समय ममता बनर्जी की TMC ने “मां, माटी, मानुष” के नारे के साथ चुनाव लड़ा और 54 में से 28 सीटें जीतकर अपनी मजबूत पकड़ बना ली। इस बीच TMC यानी तृणमूल कांग्रेस ने इस क्षेत्र पर अपना फोकस और बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अलीपुरद्वार और आसपास के तराई इलाकों से अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत की है। इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी यहाँ अपने खोए हुए जनाधार को दोबारा मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।

‘स्विंग फैक्टर’

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