पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर गहमागहमी जारी है। राज्य में SIR सुनवाई प्रक्रिया के तहत लोगों को दस्तावेजों के साथ बुलाया जा रहा है। इस बीच मंगलवार (13 जनवरी) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने से जुड़े फॉर्म-7 से भरी एक गाड़ी को पकड़ा है। यह गाड़ी तलदांगरा इलाके से खतरा की ओर जा रही थी। TMC कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इसमें सैकड़ों पहले से भरे हुए आपत्ति प्रपत्र थे, जिनका इस्तेमाल वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए किया जाना था।
तृणमूल कार्यकर्ताओं ने कार का पीछा कर खतरा सिनेमा रोड पर उसे रोक लिया और गाड़ी को खतरा पुलिस के हवाले कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही राज्य की खाद्य आपूर्ति मंत्री ज्योत्सना मंडी और तृणमूल के जिला नेता भी खतरा पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच शुरू कर दी गई है।
बता दे कि, फॉर्म-7 का इस्तेमाल किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कराने या उसका नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जाता है। नियमों के अनुसार, हर बूथ का बीएलए-2 एक समय में अधिकतम 10 फॉर्म ही जमा कर सकता है। लेकिन तृणमूल का आरोप है कि भाजपा के कुछ कार्यकर्ता एक ही गाड़ी में सैकड़ों फॉर्म-7 भरकर ले जा रहे थे, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
इस घटना के बाद TMC अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर वीडियो जारी कर दावा किया कि ये फॉर्म खाली नहीं थे, बल्कि उनमें पहले से मतदाताओं के नाम और विवरण भरे हुए थे। उन्होंने लिखा, "वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में पहले से भरे हुए फॉर्म 7 मिले। जो साफ़ तौर पर वोटरों को बिना बताए हटाने की एक सोची-समझी कोशिश की ओर इशारा करता है।" इसके साथ ही BJP पर निशाना साधा और लिखा, "दो बीजेपी कार्यकर्ताओं को मौके पर ही पकड़ लिया गया, जबकि तीन अन्य भाग गए, जिससे यह पक्का हो गया कि यह एक जानबूझकर किया गया राजनीतिक ऑपरेशन था।"
वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि उनके कार्यकर्ता सिर्फ कानूनी तरीके से बीएलए-2 के फॉर्म जमा करने जा रहे थे। उनका आरोप है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं ने गाड़ी को जबरन रोका, प्रपत्र छीन लिए और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट भी की। इस पूरे मामले ने बंगाल की राजनीति को और गरमा दिया है, खासकर ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं। तृणमूल लगातार आरोप लगा रही है कि भाजपा मतदाता सूची के जरिए चुनाव में हेरफेर करना चाहती है।