West Bengal: I-PAC के ऑफिस पर ED की रेड, मौके पर पहुंच गईं CM ममता बनर्जी, पार्टी की इंटरनल रिपोर्ट हड़पने का लगाया आरोप!
मामला तब बढ़ गया, जब केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर पर पहुंच गईं। ममता बनर्जी हाथ में कुछ फाइल लेकर साथ आते दिखीं। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ED ने हमारे IT विंग और उसके प्रमुख के घर और दफ्तर पर छापा मारा
West Bengal: I-PAC के ऑफिस पर ED की रेड, मौके पर पहुंच गईं CM ममता बनर्जी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को कोलकाता और बिधाननगर में कई जगहों पर छापेमारी की, जिनमें पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC से जुड़े कई ठिकानों पर भी रेड हुई। यह छापेमारी 2021 के कोयला तस्करी मामले के संबंध में की गई। इस दौरान साल्ट लेक की एक इमारत की 11वीं मंजिल पर मौजूद I-PAC के ऑफिस, इसके प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट वाले घर और बुर्राबाजार के पोस्टा में एक व्यापारी के ऑफिस पर छापे मारे गए।
मामला तब बढ़ गया, जब केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर पर पहुंच गईं। ममता बनर्जी हाथ में कुछ फाइल लेकर साथ आते दिखीं। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ED ने हमारे IT विंग और उसके प्रमुख के घर और दफ्तर पर छापा मारा। वे सारी जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने प्रतीक को फोन किया, वह मेरी पार्टी के प्रभारी हैं।”
#WATCH | Kolkata | West Bengal CM Mamata Banerjee says, "...Is it the duty of the ED, Amit Shah to collect the party's hard disk, candidate list?... The nasty, naughty Home Minister who cannot protect the country and is taking away all my party documents. What will be the result… https://t.co/idhFZnWuEjpic.twitter.com/rMjcef7Vhn
ममता बनर्जी ने अपने हाथ में एक हरे रंग का फाइल फोल्डर दिखाते हुए कहा, “मैंने पार्टी की फाइल इकट्ठा कर ली है। ED हमारी पार्टी की सभी गतिविधियों और योजनाओं का ब्यौरा हासिल करने की कोशिश कर रही है। वे उम्मीदवारों की लिस्ट और हमारी आंतरिक जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। क्या यह ईडी और अमित शाह का काम है? देखिए, मुझे यह फाइल और हार्ड ड्राइव मिल गई है।”
उन्होंने पूछा, “अगर मैं BJP के पार्टी कार्यालय पर छापा मारूं तो क्या होगा? इसके क्या नतीजे होंगे?”
ममता बनर्जी के आने से पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा भी जैन के घर पहुंच गए थे।
बताया जा रहा है कि यह छापेमारी कथित कोयला तस्करी मामले से जुड़ी जांच के सिलसिले में की जा रही है। ED की टीमें सुबह से ही अलग-अलग जगहों पर दस्तावेजों की जांच और पूछताछ में जुटी रहीं
पिछले कुछ सालों में इस मामले को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय रही हैं और कई बड़े नामों से पूछताछ हो चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी से भी ED और CBI इस मामले में कई बार पूछताछ कर चुकी हैं।
BJP हुई हमलावर
ED की छापे मारी पर राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "मैं इस छापेमारी पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। ईडी ही विस्तृत जानकारी दे सकती है। ममता बनर्जी केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज में दखल दे रही हैं। ममता ने आज जो किया, उससे जांच में रुकावट पैदा हुई है। मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। I-PAC कार्यालय में वोटर लिस्ट क्यों मिली? क्या I-PAC कोई पार्टी ऑफिस है? मैं ममता बनर्जी को चुनौती देता हूं कि वे कहीं भी छापेमारी करें। अगर आपके घर पर छापेमारी की गई, तो कम से कम 100 करोड़ रुपए बरामद होंगे।"
I-PAC पर छापेमारी से क्यों बिफरी ममता बनर्जी?
दरअसल ममता बनर्जी की पार्टी TMC के लिए I-PAC न केवल चुनावी रणनीति बना रही है, बल्कि वह पार्टी के IT सेल और डिजिटल मीडिया का पूरा कामकाज भी संभाल रही है।
पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए I-PAC की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
I-PAC जमीनी स्तर पर सर्वे करके यह पता लगाती है कि किस विधानसभा क्षेत्र में कौन सा नेता लोकप्रिय है। हालिया खबरों के अनुसार, उनके पास आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवारों की संभावित लिस्ट और रणनीति के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हैं।
I-PAC के प्रमुख सदस्य, जैसे प्रतीक जैन, TMC के IT सेल का नेतृत्व कर रहे हैं। वे सोशल मीडिया पर 'नैरेटिव' सेट करने और विपक्ष के हमलों का जवाब देने का काम करते हैं।
'दीदीर सुरक्षा कवच' और 'दीदीर दूत' जैसे अभियानों की सफलता के बाद, I-PAC अब नए अभियानों के जरिए जनता की राय जुटाने और सरकारी योजनाओं (जैसे लक्ष्मी भंडार) के प्रभाव का आकलन करने में जुटी है।
I-PAC क्या है?
I-PAC का पूरा नाम Indian Political Action Committee है। इसकी स्थापना 2013-14 के आसपास चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनके सहयोगियों ने की थी।
I-PAC एक कॉर्पोरेट कंपनी की तरह काम करती है, जहाँ छात्र और युवा पेशेवर (IIT/IIM जैसे संस्थानों से) राजनीति को नई दिशा देने के लिए काम करते हैं।