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पश्चिम बंगाल में SIR सुनवाई के दौरान बुजुर्ग की मौत, परिवार ने डर से आत्महत्या करने का लगाया आरोप

West Bengal: परिवार का कहना है कि, दुर्जन मांझी का नाम 'अनमैप्ड श्रेणी' में आने के बाद उन्हें SIR सुनवाई के लिए नोटिस मिला था। सुनवाई सोमवार को होने वाली थी। घरवालों का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद से ही वे लगातार तनाव में थे और बार-बार यह कहते थे कि कहीं उन्हें "बांग्लादेश भेज न दिया जाए।" परिवार का दावा है कि इसी डर के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली

Suresh Kumarअपडेटेड Dec 29, 2025 पर 8:30 PM
पश्चिम बंगाल में SIR सुनवाई के दौरान बुजुर्ग की मौत, परिवार ने डर से आत्महत्या करने का लगाया आरोप
पश्चिम बंगाल में SIR सुनवाई के दौरान बुजुर्ग की मौत, परिवार ने डर से आत्महत्या करने का लगाया आरोप

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही सुनवाई के बीच पुरुलिया जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। पारा विधानसभा क्षेत्र के चौटाला गांव में 82 वर्षीय बुजुर्ग दुर्जन मांझी की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि SIR सुनवाई के डर के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली। यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब राज्य में SIR को लेकर पहले से ही सियासी माहौल गरमाया हुआ है और तृणमूल कांग्रेस इसे लेकर सरकार व चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है।

परिवार का कहना है कि, दुर्जन मांझी का नाम 'अनमैप्ड श्रेणी' में आने के बाद उन्हें SIR सुनवाई के लिए नोटिस मिला था। सुनवाई सोमवार को होने वाली थी। घरवालों का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद से ही वे लगातार तनाव में थे और बार-बार यह कहते थे कि कहीं उन्हें "बांग्लादेश भेज न दिया जाए।" परिवार का दावा है कि इसी डर के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली।

सोमवार (29 दिसंबर) की सुबह दुर्जन मांझी सुनवाई में जाने के लिए घर से निकले थे। बताया जा रहा है कि ब्लॉक कार्यालय उनके घर से करीब 10 किलोमीटर दूर है। परिवार के मुताबिक, वे ऑटो या टैक्सी बुलाने के लिए घर से बाहर निकले थे, लेकिन कुछ ही देर बाद आद्रा डिवीजन की अनारा-रुकनी रेलवे लाइन पर ट्रेन के सामने कूद गए, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

मृतक दुर्जन मांझी BCCL के रिटायर्ड कर्मचारी थे। परिवार का कहना है कि उन्होंने सभी जरूरी कागजात के साथ SIR फॉर्म भी भरा था, फिर भी उन्हें सुनवाई का नोटिस मिला। हैरानी की बात यह है कि उनकी पत्नी, बेटा और बेटी को अभी तक किसी तरह का नोटिस नहीं भेजा गया था। इसी असमंजस और डर ने उनकी मानसिक स्थिति को और बिगाड़ दिया।

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