पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर सियासत तेज है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से कई सीटों का गणित बदलता नजर आ रहा है। खासकर वे सीटें जहां पिछले विधानसभा के चुनाव में जीत-हार का अंतर बेहद कम था, वहां इस बार स्थिति और दिलचस्प हो सकती है।
जानकारी के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से पहले ही करीब 58 लाख नाम हटाए गए थे। अब फाइनल लिस्ट में भी 7 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए है। यानी कुल मिलाकर 65 लाख से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो चुके हैं। इसके अलावा करीब 60 लाख से ज्यादा नाम अभी भी पेंडिंग बताए जा रहे हैं, जिन पर फैसला होना बाकी है।
कई ऐसी सीटें हैं जहां पिछली बार जीत का अंतर 500 से 1000 वोट के बीच था।
पिछली बार बलरामपुर में BJP सिर्फ 423 वोटों से जीती थी, लेकिन वहां करीब 19 हजार से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। 2021 के चुनाव में BJP के बानेश्वर महतो ने TMC के शांतिराम महतो को हराया था। भाजपा की जीत से पहले, शांतिराम महतो यहां से 2011 और 2016 में विधायक रहे थे और राज्य सरकार में मंत्री पद पर भी थे।
वहीं, दंतान में पिछली बार TMC 623 वोटों से जीती थी और वहां लगभग 10 हजार नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC के बिक्रम चंद्र प्रधान ने भाजपा के उम्मीदवार को मामूली अंतर के वोटों से हराया था। बिक्रम चंद्र प्रधान यहां से 2011, 2016 और 2021 में लगातार तीन बार विधायक चुने गए हैं। इसके अलावा कुल्टी, तमलुक और जलपाईगुड़ी जैसी सीटों पर भी हजारों नाम हटाए जाने की खबर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इसका फायदा किसे होगा और नुकसान किसे?
BJP का दावा है कि वोटर लिस्ट से फर्जी और घुसपैठिए के नाम हटाए गए हैं, जिससे चुनाव निष्पक्ष होगा। वहीं TMC केंद्र सरकार पर आरोप लगा रही है कि जानबूझकर नाम काटे जा रहे हैं और इससे असली वोटरों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। दोनों ही पार्टियां अपने-अपने हिसाब से आंकड़ों का विश्लेषण कर रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो करीब 60 लाख से ज्यादा नाम पेंडिंग हैं, उनमें से कितने सप्लीमेंट्री लिस्ट में शामिल होंगे? ज्यूडिशियल अधिकारियों को दस्तावेजों की जांच कर अंतिम फैसला देना है। अगर बड़ी संख्या में नाम वापस जुड़ते हैं, तो चुनावी तस्वीर बदल सकती है। लेकिन अगर नहीं जुड़ते, तो कई सीटों पर वोट का गणित पूरी तरह पलट सकता है। इससे साफ है कि इस बार बंगाल चुनाव में सिर्फ प्रचार और रैलियां ही नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट भी बड़ा मुद्दा बनने वाली है।