सुबह के ठीक 8 बजे हैं। सफेद सूती साड़ी, जिस पर काले रंग का बॉर्डर है, पहने एक महिला बंगाल के पानीहाटी में भाजपा कार्यालय में प्रवेश करती हैं। कार्यकर्ताओं के अभिवादन के बीच उनके चेहरे पर एक फीकी मुस्कान है, लेकिन आंखों में गहरा दर्द साफ झलकता है।
सुबह के ठीक 8 बजे हैं। सफेद सूती साड़ी, जिस पर काले रंग का बॉर्डर है, पहने एक महिला बंगाल के पानीहाटी में भाजपा कार्यालय में प्रवेश करती हैं। कार्यकर्ताओं के अभिवादन के बीच उनके चेहरे पर एक फीकी मुस्कान है, लेकिन आंखों में गहरा दर्द साफ झलकता है।
बाकी देश के लिए वह 'अभया' की मां हैं- उस 31 साल की जूनियर डॉक्टर की मां, जिसके साथ अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में दरिंदगी हुई और फिर उसकी हत्या कर दी गई। आज वह अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांगने और सिस्टम से लड़ने के लिए घर-घर जाकर चुनाव प्रचार कर रही हैं।
उनकी साड़ी के बॉर्डर पर बंगाली में एक शक्तिशाली वाक्य कढ़ा हुआ है: "मैंने अपनी रीढ़ की हड्डी नहीं बेची है।"
"बेटी से मिलती है ताकत"
NDTV की मुताबिक, जब रत्ना देबनाथ से पूछा गया कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद उनमें यह शक्ति कहां से आती है, तो उन्होंने रुंधे गले से कहा, "मेरी बेटी से, जो अपनी आखिरी सांस तक लड़ती रही।"
9 अगस्त 2024 को रत्ना की दुनिया उजड़ गई थी, जब आरजी कर अस्पताल के सेमिनार रूम में उनकी बेटी का शव मिला था। इस मामले ने पूरे देश को हिला दिया था। पुलिस ने एक सिविक वालंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया, लेकिन माता-पिता की तरफ से सबूतों से छेड़छाड़ और ममता सरकार पर 'कवर-अप' के आरोपों के बाद जांच CBI को सौंप दी गई थी।
पानीहाटी की गलियों में 'इंसाफ' के नारे
9 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले पानीहाटी में 'We Want Justice' (हमें न्याय चाहिए) के नारे फिर से गूंज रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे के जरिए वोटरों को याद दिला रही है कि तृणमूल शासन महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहा है।
प्रचार के दौरान महिलाएं रत्ना को गले लगाती हैं। बेंगलुरु में काम करने वाली एक युवती की मां ने कहा, "मेरी बेटी भी देर रात तक बाहर रहती है। एक मां होने के नाते मैं इनका दर्द समझ सकती हूं। भगवान न करे किसी मां को वो देखना पड़े जो इन्होंने देखा।"
रत्ना कहती हैं, "मैंने भाजपा को इसलिए चुना, क्योंकि तृणमूल से लड़ने का यही एकमात्र तरीका था। मैं चाहती हूं कि राज्य की हर महिला सुरक्षित महसूस करे।"
तृणमूल का पलटवार: "बंगाल सबसे सुरक्षित"
वहीं दूसरी तरफ, पानीहाटी में ढाक की आवाज और शंख की गूंज के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार तीर्थंकर घोष का प्रचार चल रहा है। वह पांच बार के विधायक निर्मल घोष के बेटे हैं।
तीर्थंकर कहते हैं, "मुझे काकीमा (रत्ना) के प्रति बहुत सम्मान है, लेकिन जिस पार्टी से वह लड़ रही हैं, उसके बारे में कुछ नहीं कहना। यह वही पार्टी है, जो हाथरस के आरोपियों का स्वागत करती है। बंगाल महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित है और यहां नाइट शिफ्ट में काम करने में कोई समस्या नहीं है।"
TMC के समर्थक ममता बनर्जी की 'लखीर भंडार' जैसी कल्याणकारी योजनाओं का हवाला दे रहे हैं, जिसमें मिलने वाली राशि अब 500 रुपए बढ़ा दी गई है।
पानीहाटी का त्रिकोणीय मुकाबला
इस बार लड़ाई त्रिकोणीय है। लेफ्ट (CPIM) ने युवा नेता कलतान दासगुप्ता को मैदान में उतारा है।
लेफ्ट का कहना है, "हमने पार्क स्ट्रीट से लेकर आरजी कर तक तृणमूल का चेहरा देखा है, और हाथरस-उन्नाव में भाजपा का। ये दोनों एक ही नाव में सवार हैं। हमारी लड़ाई विचारधारा की है।"
कलतान को सितंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं।
पानीहाटी की जनता 9 अप्रैल को तय करेगी कि वह 'इंसाफ' की इस लड़ाई, 'कल्याणकारी योजनाओं' के वादे या 'वामपंथी विचारधारा' में से किसे चुनती है।
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