पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल के OSD ने कन्फर्म किया है कि आनंद ने अपना इस्तीफा भारत की राष्ट्रपति को भेज दिया है। उनकी जगह अब आरएन रवि पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल होंगे। रवि अभी तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसके अलावा लद्दाख के LG कविंदर गुप्ता ने भी इस्तीफा दे दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोस ने अपना इस्तीफा दिल्ली भेज दिया है। उन्होंने साल 2022 में जगदीप धनखड़ के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का पद संभाला था और तीन साल से ज्यादा समय तक इस जिम्मेदारी पर रहे।
कार्यकाल खत्म होने से पहले ही इस्तीफा
सीवी आनंद बोस का कार्यकाल नवंबर 2027 तक चलना था। लेकिन उन्होंने करीब 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। गुरुवार को राज्यपाल के OSD ने भी उनके इस्तीफे की पुष्टि की।
सूत्रों के अनुसार, उन्होंने निजी कारणों की वजह से पद से इस्तीफा दिया है। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को दी जा सकती है जिम्मेदारी
ममता बनर्जी ने जताई हैरानी
इधर ममता बनर्जी ने इस इस्तीफे पर हैरानी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बोस का अचानक इस्तीफा “चौंकाने वाला” और “चिंताजनक” है।
ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि संभव है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उन्हें कुछ “राजनीतिक हितों” के लिए दबाव में लाया गया हो।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, "मैं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफा देने की खबर से हैरान और काफी चिंतित हूं। फिलहाल मुझे उनके इस्तीफे की असली वजह नहीं पता है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अगर यह सामने आता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक हितों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से उन पर दबाव डाला गया हो, तो मुझे हैरानी नहीं होगी।"
मुख्यमंत्री ने अमित पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिना राज्य सरकार से सलाह लिए आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त करना संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है।
ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार को “सहकारी संघवाद” के सिद्धांत का सम्मान करना चाहिए और राज्यों की गरिमा को प्रभावित करने वाले एकतरफा फैसलों से बचना चाहिए।
उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री ने अभी मुझे जानकारी दी है कि श्री आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। लेकिन इस मामले में स्थापित परंपरा के मुताबिक मुझसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया।
इस तरह के कदम भारत के संविधान की भावना को कमजोर करते हैं और हमारे संघीय ढांचे की बुनियाद को नुकसान पहुंचाते हैं। केंद्र सरकार को सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे एकतरफा फैसलों से बचना चाहिए, जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को कमजोर करते हैं।"