पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। गुरुवार (26 फरवरी) को महंगाई भत्ता (DA) की मांग को लेकर 'संग्रामी संयुक्ति मंच' समेत को कई कर्मचारी संगठनों ने कोलकाता में बड़ा मार्च निकाला।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। गुरुवार (26 फरवरी) को महंगाई भत्ता (DA) की मांग को लेकर 'संग्रामी संयुक्ति मंच' समेत को कई कर्मचारी संगठनों ने कोलकाता में बड़ा मार्च निकाला।
यह प्रदर्शन मार्च धर्मतला से शुरू होकर कालीघाट की ओर बढ़ रहा था, लेकिन पुलिस ने बीच रास्ते में बैरिकेड लगाकर उसे रोक दिया। वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी जायज़ मांगों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। उनका दावा है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी DA देने को लेकर आदेश दिया है, फिर भी राज्य सरकार पूरी राशि देने में देरी कर रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में काफी कम महंगाई भत्ता मिल रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
आंदोलन को देखते हुए धर्मतला के इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। मेट्रो चैनल से निकला जुलूस डोरीना क्रॉसिंग तक पहुंचा, लेकिन आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। कालीघाट की ओर जाने वाले रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और कहा कि बैरिकेड फिलहाल नहीं हटाए जाएंगे। स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पर भी असर पड़ा और आसपास की सड़कें आंशिक रूप से बंद रहीं।
इस आंदोलन में सिर्फ एक संगठन ही नहीं, बल्कि अलग-अलग कर्मचारी यूनियन शामिल थीं। कई संगठनों ने यह भी कहा कि चुनाव नजदीक हैं, इसलिए सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार पर वादा पूरा न करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि महंगाई बढ़ती जा रही है, लेकिन वेतन और भत्तों में उसी रेशियों में बढ़ोतरी नहीं हो रही।
बता दे कि चुनाव से पहले DA बढ़ोतरी का मुद्दा तूल पकड़ रहा हैं। इससे पहले भी सरकारी कर्मचारियों ने DA बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि कोर्ट के आदेश के बाद भी DA को लागू नहीं किया गया, और सरकार इसे रिव्यू करने वाली है। हालांकि, सरकार की तरफ से कहा गया है कि इस मुद्दे को लेकर टीम गठित की जा रही है और इसका मुआयना किया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार के चुनाव में DA मुद्दा अहम भूमिका निभा सकता है। सरकारी कर्मचारियों की संख्या बड़ी है और उनका परिवार व सामाजिक प्रभाव भी व्यापक होता है। ऐसे में यह आंदोलन चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है। चुनाव से पहले जिस तरह DA को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन हो रहा है, उससे साफ है कि यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
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