Get App

Cinema Ka Flashback: मां थीं तवायफ, पिता ने बदला था धर्म... विवादों के बीच बेटी ने सिनेमा में रचा इतिहास

Cinema Ka Flashback: नरगिस दत्त का जीवन संघर्ष और साहस से भरा रहा। तवायफ मां और धर्म परिवर्तन करने वाले पिता की संतान होने के बावजूद उन्होंने भारतीय सिनेमा को मदर इंडिया जैसी ऐतिहासिक फिल्म दी

Shradha Tulsyanअपडेटेड Mar 06, 2026 पर 5:15 PM
Cinema Ka Flashback: मां थीं तवायफ, पिता ने बदला था धर्म... विवादों के बीच बेटी ने सिनेमा में रचा इतिहास

बॉलीवुड की स्वर्ण युग की चमकती सितारा नरगिस दत्त ने न सिर्फ परदे पर अपनी अमिट छाप छोड़ी, बल्कि 'मदर इंडिया' जैसी महान फिल्म देकर इतिहास रच दिया। 1920 के दशक की मशहूर तवायफ़ जद्दनबाई उनकी मां थीं, जिन्होंने बेटी को सिनेमा की दुनिया में उतारा। पिता ने हिंदू से इस्लाम कबूल कर नाम बदला, लेकिन नरगिस ने अपनी मेहनत से भारत को दुनिया का सबसे बड़ा हिट दिया।

नरगिस का जन्म 1 जून 1929 को कोलकाता में फातिमा रशीद के नाम से हुआ। उनके पिता उत्तमचंद मूलचंद, रावलपिंडी के अमीर हिंदू ब्राह्मण थे, जिन्होंने इस्लाम अपनाकर अब्दुल रशीद बन गए। मां जद्दनबाई बनारस की क्लासिकल गायिका, नर्तकी, संगीतकार और पहली महिला निर्देशकों में से थीं। उन्होंने 'तलाश-ए-हक़' जैसी फ़िल्में बनाईं। इलाहाबाद से कोलकाता शिफ्ट होने के बाद घर सिनेमा का केंद्र बन गया। मात्र 6 साल की उम्र में नरगिस ने मां की फ़िल्म से डेब्यू किया, लेकिन असल धमाल 'राजकुमार' (1946) से मचाया।

सुनील दत्त के साथ 'मदर इंडिया' (1957) ने नरगिस को अमर कर दिया। इस फ़िल्म ने 80 हफ्ते थिएटर में दौड़ लगाई और आज भी भारत की सबसे कमाई करने वाली फ़िल्म है। एक मां की त्रासदीपूर्ण कहानी ने ऑस्कर नामांकन दिलाया। सेट पर आग लगने से सुनील ने उनकी जान बचाई, जिससे प्यार हुआ। 1958 में शादी के लिए नरगिस ने हिंदू धर्म अपनाया। संजय दत्त, नम्रता और प्रिया दत्त जैसे बच्चे हुए। सुनील संग वो सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहीं।

लेकिन किस्मत ने धोखा दिया। 1981 में पैंक्रियास कैंसर से मात्र 51 साल की उम्र में निधन हो गया। राज कपूर के साथ 16 फिल्मों में काम कर 'आह' और 'श्री 420' जैसी हिट्स दीं। नरगिस ने परंपरा लांघी तवायफ की बेटी से सांसद बनीं। उनकी कहानी संघर्ष, प्यार और सिनेमा की जीत है। संजय दत्त ने मां की याद में कैंसर अस्पताल बनवाया। आज भी 'मदर इंडिया' प्रेरणा देती है, जो दिखाती है कि जड़ें कितनी भी गहरी हों, ऊंचाई सबको छू सकती है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें