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Sanjay Kapoor: माधुरी दीक्षित भी नहीं बदल सकीं इस एक्टर की किस्मत, विलेन बनने पर भी नहीं चमका करियर!

Sanjay Kapoor: बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने बड़े सपनों के साथ इंडस्ट्री में कदम रखा, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। संजय कपूर ने पहचान आज भी संघर्ष और असफलताओं से जुड़ी है। दिलचस्प बात यह है कि उनके करियर को संवारने के लिए खुद माधुरी दीक्षित जैसी सुपरस्टार ने भी कोशिश की, लेकिन नतीजा उम्मीदों के विपरीत रहा।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Jan 07, 2026 पर 5:44 PM
Sanjay Kapoor: माधुरी दीक्षित भी नहीं बदल सकीं इस एक्टर की किस्मत, विलेन बनने पर भी नहीं चमका करियर!

बॉलीवुड में कई सितारे ऐसे होते हैं जिनके पास टैलेंट तो भरपूर होता है, लेकिन किस्मत उनका साथ नहीं देती। संजय कपूर भी इन्हीं में से एक हैं। भाई बोनी कपूर के प्रोडक्शन में बड़े-बड़े सितारों संग काम किया, फिर भी लीड हीरो कभी न बन सके। माधुरी दीक्षित जैसी धक-धक गर्ल के साथ 'राजा' फिल्म में रोमांस किया, जो हिट रही, लेकिन संजय का करियर उसकी छाया से बाहर न आ सका। आज भी लोग फिल्म को याद करते हैं पर संजय की फैनफॉलोइंग काफी कम है।

90 के दशक में संजय का सफर शानदार शुरू हुआ। तबू संग डेब्यू 'प्रेम' में उनका करियार ठीक रहा, लेकिन उसके बाद 'साजन की साइनी', 'सौतेला भाई' जैसी फिल्में आईं जो औंधे मुंह बॉक्स ऑफिस पर गिर गई। फिर आया करिश्मा कपूर वाला 'प्रेम अगर मामला है' का मौका, मगर वो फिल्म भी नहीं चली। सबसे बड़ी उम्मीद 'राजा' से बंधी थी। 1995 में इंद्र कुमार की ये एक्शन-रोमांस माधुरी के जलवे से सुपरहिट हुई। संजय ने भी कोशिश की, लेकिन दर्शकों का दिल जीतने में नाकाम रहे। बड़े बैनर, बड़ी को-स्टार्स के बावजूद वो कभी मेनस्ट्रीम स्टार नहीं बन पाए।

2002 में एक्टर भाई बोनी की 'कोई मेरे दिल से पूछे' में विलेन बने। आफताब शिवदासनी, जया बच्चन, ईशा देओल संग ये फिल्म नेगेटिव रोल में संजय की नई शुरुआत का वादा किया। सबको लगा अब इमेज चेंज हो जाएगी। मगर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट गई। 25 साल बाद भी इसे कास्ट की वजह से याद किया जाता है। एक्टर ने विलेन का किरदार निभाकर ट्राई किया लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।

समय बीता तो लीड रोल्स गायब हो गए। संजय अब सपोर्टिंग किरदार निभाते हैं। OTT प्लेटफॉर्म्स पर वेब सीरीज में छोटे-मोटे रोल कर रहे हैं, ताकि इंडस्ट्री से जुड़े रहें। बोनी-अनील कपूर के भाई होने का फायदा मिला, लेकिन खुद की पहचान न बना सके। संजय का सफर सिखाता है कि बॉलीवुड में टैलेंट के साथ किस्मत भी चाहिए। आज 65 साल की उम्र में वे संतुष्ट दिखते हैं, लेकिन फैंस को अफसोस है कि इतना संघर्ष व्यर्थ गया।

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